Book Title: Anusandhan 1999 00 SrNo 15
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
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अनुसंधान-१५.55
सुमतिजिन एकशत मतिधरु गणहरा वीस सहस्सग्गला तीन लखा पुरा । एकशत-सात पऊमप्पहे गणहरा तीस सहस्सग्गला तीन लक्खा घ(व)रा ॥२४॥ जिणसुपासस्स पंचाणूंआ गणहरा तीन लक्खा नमो साहू सोहाकरा । सामि चंदप्पहे त्राणुंआ गणहरा अढीअ लक्खा तहा साहू धम्मागरा ॥२५॥ असीअ अट्टग्गला सुविहिजिणि गणहरा दोइ लक्खाऽणगारा य मंगलकरा । सीतले नमसुं एकासीआ गणहरा एगलक्ख मुणीणं नमो भविवरा ॥२६॥
___ (६) ढाल (सामलिआनी) राग-मल्हार अजितजिणिदतित्थं नमो, नमो सगर मुर्णिदो । नमह मघवं च चक्की मुर्णि, सणंकुमर नरिंदो ॥२७॥ संति-कुंथु-अरजिणवरं, पउमं दिरिसेणं । जेहिं मुक्कं च चक्कित्तणं, नमह तं जयसेणं ॥२८॥ विमलतित्थंमि जं दीक्खिअं, महाबलय मुणीसं । सेठिसुदंसणं तं पुणो, महावीरजिणसीसं ॥२९॥
गाहा अचलं विजयं भई, वंदे सुप्पभ-सुदंसणं सिद्धं । आणंदनंदणं च, पउमइय अट्ठ बदेवे(वंदेवे ?) ॥३०॥ जेणुग्गतवं तत्तं, अवराहं दटुं नियप(स)रूवस्स । तुंगिअगिरिवरसिहरे, सो राममहामुणी जयउ ॥३१॥
(७) ढाल (परममुनिनी) राग-सामेरी सामिसेआंस बावत्तरि गणहरा सहस चउरासीआ पवर-जोगीसरा ।
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