Book Title: Agam Sampadan Ki Yatra
Author(s): Dulahrajmuni, Rajendramuni
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 170
________________ आगमों में विगयविवेक १५७ ४. करम्बक-दही सहित चावल। ५. मट्ठा या रायता। घृत के पांच विकृतिगत हैं१. औषधियों से पका हुआ घृत । २. घृत के ऊपर का मैल। ३. घृत में पकाई गई औषधियों पर आया हुआ घृत । ४. जला हुआ घृत। ५. दही की मलाई पर आया हुआ घृत । तेल के पांच विकृतिगत हैं१. तेल के ऊपर का तेल। २. तिलकुटि। ३. जला हुआ तेल। ४. तेल में पकाई गई औषधियों के ऊपर से निकला हुआ तेल । ५. लाक्षादि द्रव्यों से पका हुआ तेल । गुड़ के पांच विकृतिगत हैं१. आधा उबला हुआ ईक्षु रस। २. गुड़ का पानी। ३. शर्करा। ४. खांड। ५. चासनी। अवगाहिम विगय के पांच विकृतिगत हैं १. एक पूड़े से पूरी कड़ाई भर जाए, उस पर दूसरा पूड़ा डाला जाए, वह विकृतिगत है, विकृति नहीं। २. तीन घाण के बाद चौथे घाण में तला हुआ पदार्थ । ३. गुड़धानी।

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