Book Title: Uttaradhyayana Sutra
Author(s): Sudharmaswami, Jaysundar
Publisher: Sanchor

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Page 155
________________ Paracal P SI यावस्तातिपसम टेanaनवेथावाचकम्युजीवमिन करावयात्रिभरममात्रकर्मनाथ ॥HE देसादनासवरणमरान निसहित ४२ २व-श्कर मिकाई। घनिम्पनाकम्हिताधर्वकविश्वरक्षणाचारिचालशताकर्मडनाणुनूंषणकर) जावलघुसनअपमानवगममक्षिता सावन मानव रख रा नयागावयायडिसत्यागीमालावियोमाणयाल यमायागडनिधिसतिगविसहसम्म लिंगंसहितकुलिंगविम्न ममकिवसम्पराक्रमअनमतिमाहतमजीवनविषविश्वासकारदेवानलाएकरणस्ताकपलिहागणाति ११ वा नामसमिसमानसध्यागात्यजीवमानसघाममणियमावायोटिलाहजिदिपविधनतवममिगुसमन्नागर amaste याविलवावयाचशातजावयाच्या निगरमामायाकामनिबंधवाधासवगुणसंयन्नया उभिर्वकरई) जीवनर्वगुणिकरसंररमऊउ जेणागतिग्पायबनी अावागममनधी एतलईपुगलिगतिझपाई। जीवनमुक्ति पगांसासासवगुणसंयनयानयागरावत्रिण8 1 शराबनियानयाजावमारीरमाणामाशंकरका पाम्यापबागरीरमनसंबंधी हेलगवनजीवानरागरहित आधागर हिनऊबस्नहबंधनाबदई। मनान्यराद डरकानालागवई Janामिक र गामानशासवशायाधीय गायोएगीता वीरारागगा मानहाणुबंधामाणितष्टाणुबंधापणियावासिंदधामणु म स्पर्शरसम्यगंधधकाधिश्मई अनज्वैराग्ययांमई ॥॥ हलगवनजीवामाकरणसिकरई। जीवक्षमाकरीयरीमहनाप ॥४६ राससदफारिसरममवाधसाचनविरामवंतालाजानकिंजणवंताशयरीमाहाशा हितगवनजानिलीतपणा जावनिलतियाणाई अकिंचनपाएं निःपरग्रहपणुंकरखें। जीवनिपरिग्रहावअर्धनासीरुपमशागवारहित मुत्राशीतीतजावयानीगयाणशकिचाकरणशकिणराजीवकिलानाशांमुरिसागपाणित

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