Book Title: Satik Gacchachar Prakirnak Sutram
Author(s): Purvacharya, Danvijya Gani
Publisher: Dayavijay Granthmala

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Page 277
________________ य बहूहि कालवडिओहिणा आभोपमा हत्ता संजमेणं लोगाओ आउक्खएणं जाव कहिं उववज्जिहिति ? गोयमा ! महाविदेहे वासे जाव अंतं काहिति ॥ अथ काल्युदाहरणम् । यथा-तेणं कालेणं तेणं समएणं रायगिहे नगरे गुणसिलए चेइए सेणिए राया चिलणा देवी सामी समोसढे, परिसा निग्गया जाव परिसा पज्जुवासेइ, तेणं कालेणं तेणं समएणं काली नाम देवी चमरचंचाए रायहाणीए कालव हिंसगभवणे कालंसि सीहासणंसि चउहिं सामाणियसाहस्सीहि, चरहिं मयहरियाहिं, सपरिवाराहिं, तिाह परिसाहि,सत्तहिं अणिएहि,सहि अ. णियाहिबई हिं, सोलसहिं आयरक्खदेवसाहस्सीहि,अण्णेहि य बहूहि कालवडिसयभवणवासीहिं असुरकुमारेहिं देवेहिं देवीहि य साद्ध संपरिवुडा महया जाव विहरइ, इमं च णं केवलकप्पं जंबुद्दीवं दीवं विउलेणं ओहिणा आभोएमाणी २ पासइ, तत्थ समणं भगवं महावीरं जंबुद्दीवे दीवे भारहे वासे रायगिहे नगरे गुणसिलए चेइए अहापडिरूवं उग्गह उगिण्हित्ता संजमेणं तवसा अप्पाणं भावेमाणे पासइ २ ता, हतुट्ठचित्तमाणंदिया पीयमणा जाव हयहियया सीहासणाओं अन्भुढेइ २ चा पायपीढाओ पच्चोरुहइ २त्ता पाउयाओ ओमुयइ २ त्ता तित्थगराभिमुही सत्तटुपयाई अणुगच्छइ २त्ता वाम जाणुं अंचेइ दाहिणं जाणुं धरणितलंसि निहट्ट तिक्खुत्तो मुद्धाणं धरणितलंसि णिवेसेइ २ ता इसिं पच्चुण्णमइ २ ता कडयतुडियर्थभियाओ भुयाओ साहरइ २त्ता करयल जाव कटु एवं वयासी-नमोत्थु णं अरहताणं जाव संपत्ताणं णमोत्थु णं समणस्स भगवओ महावीरस्स जाव संपाविउकामस्स, वदामि णं भगवंतं तत्थ गयं इह गया पासउ मे समणे भगवं महावीरे तत्थ गए इह गयं तिकटु वंदइ०२ सीहासणवरंसि पुरत्याभिमुहा णिसण्णा, तए णं तीसे कालीए देवीए इमेयारूवे जाव समुप्पज्जित्था-सेयं खलु मे समणं भगवं महावीरं वंदित्ता जाव पज्जुवासित्तएत्तिकटु एवं संपेहेइ २ त्ता आभिओगियदेवे सहावेइ २ त्ता एवं वयासी-एवं खलु

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