Book Title: Jain Siddhant Darpan
Author(s): Gopaldas Baraiya
Publisher: Anantkirti Digambar Jain Granthmala Samiti

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Page 135
________________ [ १७१ ] मध्यलोक | अधोलोकसे ऊपर एक राज् लम्बा एक राजू चौड़ा और एक लाख चालीस योजन ऊंचा मध्यलोक है । इस मध्यलोकके बिलकुल बीचमें गोलाकार एक लक्ष योजन व्यासवाला जम्बूद्वीप है । जम्बूद्वीपको खाईकी तरह बेड़े हुए गोलाकार लवणसमुद्र है । इस लवणसमुद्रकी चौड़ाई सर्वत्र दो लक्ष योजन है । पुनः लवणसमुद्रको चारों तरफसे बेड़े हुए गोलाकार धातुकीखण्डद्वीप है, जिसकी चौड़ाई सर्वत्र चार लक्ष योजन है । धातुकीखंडको चारों तरफसे बेड़े हुए आठ लक्ष योजन चौड़ा कालोदधि समुद्र है । तथा कालोदधि समुद्रको चारों तरफसे बेड़े हुए सोलह लक्ष योजन चौड़ा पुष्करद्वीप है । इसही प्रकारसे दूने दूने विस्तारको लिये परस्पर एक दूसरेको बेड़े हुए असंख्यात द्वीप समुद्र हैं । अंतम स्वयंभूरमण समुद्र है । चारों कोनोंमें पृथ्वी है । पुष्करद्वीपके बीचों बीच मानुषोत्तरपर्वत है, जिससे पुष्करद्वीपके दो भाग हो गये हैं। जम्बूद्वीप धातुकीखंड और पुष्करार्द्ध, इस प्रकार ढाई द्वीपमें मनुष्य रहते हैं । ढाई द्वीप के बाहर मनुष्य नहीं है तथा तिर्यंच समस्त मध्यलोकमें निवास करते हैं स्थावर जीव समस्त ठोकमें भरे हुए हैं । जलचर जीव लवणोदधि कालेोदधि और स्वयंभूरमण इन तीन समुद्र में ही होते हैं, अन्य समुद्रोंमें नहीं । 1 जम्बूद्वीप एक रक्ष योजन चौड़ा गोलाकार है । इस जम्बूद्वीपमें पूर्व और पश्चिम दिशामें लम्बायमान दोनों तरफ पूर्व और पश्चिम समुद्रको स्पर्श करते हुए १ हिमवन्, २ महाहिमवन्, ३ निपध, ४ नील, ५ रुक्मि और ६ शिखरी, इस प्रकार छह कुलाचल (पर्वत) हैं । इन कुलाचलोंके निमित्तसे सात भाग हो गये हैं ।

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