Book Title: Jain Ganitanuyog
Author(s): Vijayshree Sadhvi
Publisher: Vijayshree Sadhvi

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Page 173
________________ इन्द्र नाम सचित्र जैन गणितानुयोग वैमानिक देवलोक की तालिका देवलोकों के विमान विमान विमानों सामानिक आत्म- आभ्यन्तर मध्यम बाह्य देवों की देवों | देवों ऊपर तक नीचे तक नाम के की देव रक्षक परिषद परिषद परिषद देह का का की का - अवधि अवधि आधार आकार ऊँचाई देव / के देव | के देव के देव प्रमाण देहवर्ण आयु आहार | ज्ञान ज्ञान 1. सौधर्म घनादाचा अर्धचंद्र | 500 यो. शक्रेन्द्र | 84,00013,36,000/ 12,000|14,000/16,00017 हाथ | रक्त / मग | 2 सागर | 2 हजार विमान की रत्नप्रभा / स्वर्ण वर्ष में ध्वजा तक 2. ईशान घनोदधि अर्धचंद्र 500 यो. | ईशानेन्द्र | 80,0003,20,000|10,000 12,000/14,000/7 हाथ | रक्त | 2 सागर 2 हजार विमान की रत्नप्रभा स्वर्ण अधिक वर्ष में ध्वजा तक 3. सनतकुमार घनवात | अर्धचंद्र 600 यो. सनत्कुमारेन्द्र 75,0003,00,000| 8,000 10,000|12,000/6 हाथ | कमल शूकर 7 सागर 7 हजार विमान की शर्कराप्रभा केशर ध्वजा तक 4. महेन्द्र घनवात अर्धचंद्र 600 यो. माहेन्द्र 70,0002,80,000|6,000|8,00010,000/6 हाथ कमल सिंह 7 सागर | 7 हजार विमान की शर्कराप्रभा केशर अधिक ध्वजा तक 5. ब्रह्मलोक घनवात पूर्णचंद्र | 700 यो. ब्रह्म लोकेन्द्र 60,0002,40,000| 4,000|6,000|8,00015 हाथ | कमल बकरा 10 सागर 10 हजार विमान की बालुकाप्रभा केशर ध्वजा तक 6. लांतक घनोदधि पूर्णचंद्र 700 यो. लांतकेन्द्र 50,000 2,00,000/ 2,0004,0006,0005 हाथ | श्वेत मेंढक 14 सागर 14 हजार विमान की बालुकाप्रभा घनवात ध्वजा तक 7. महाशुक्र घनादाध पूर्णचंद्र | 800 यो. महाशुक्रेन्द्र 40,000|1,60,000/ 1,0002,0003,000/4 हाथ | श्वेत घोड़ा 17 सागर 17 हजार विमान की पंकप्रभा घनवात ध्वजा तक 8. सहस्रार | पूर्णचंद्र 800 यो. सहस्रारेन्द्र 30,000|1,20,000/5001,000 2,000/4हाथ | श्वेत हाथी 18 सागर 18 हजार विमान की पंकप्रभा घनवात ध्वजा तक 9. आनत आकाश अर्धचंद्र 900 यो. 3 हाथ | श्वेत सर्प | 19 सागर 19 हजार विमान की धूमप्रभा दोनों के ध्वजा तक 10. प्राणत | | 20,000 आकाश अर्धचंद्र 900 यो. एक 80,000-250500 | 1,000 3 हाथ | श्वेत | गेंडा 20 सागर 20 हजार विमान की धूमप्रभा प्राणतेन्द्र ध्वजा तक 11. आरण आकाश अर्धचंद्र 900 यो. 3 हाथ | श्वेत बैल 21 सागर 21 हजार विमान की धमप्रभा दोनों के ध्वजा तक 12. अच्युत एक | 10,000 40,000 125 | 250 500 आकाश अर्धचंद्र 900 यो. अच्युतेन्द्र श्वेत मृग 22 सागर 22 हजार विमान की धूमप्रभा ध्वजा तक 9. नौग्रैवेयक आकाश पूर्णचंद्र | 1000 यो. इन्द्र नहीं 2 हाथ | श्वेत मृग 23 से 31/23 से 31 विमान की तमःप्रभा होते सागरोपम हजार ध्वजा तक पाँच अनुत्तर आकाश पूर्णचंद्र | 1100 यो. इन्द्र नहीं 1 हाथ | श्वेत मृग 31 से 33/31 से 33| सिद्धशिला त्रसनाड़ी सागरोपम हजार वर्ष तक कुछ कम | इन एकेक इन्द्रों के 7 प्रकार की अणिका (सेना) है, यथा-1, गन्धर्व,2. नाटक, 3. हस्ती, 4. घोड़े, 5. रथ, 6. पैदल, 7. वृषभ। 151 होते

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