Book Title: Anusandhan 2008 09 SrNo 45
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

View full book text
Previous | Next

Page 8
________________ सप्टेम्बर २००८ तीर्थमाळामां पूर्वदिशानां तीर्थोनुं वर्णन करतां कडी १५१मां - 'ओस वंशे शान्तिदास श्रीचिन्तामणि पूज्या पास' एम शान्तिदास शेठ द्वारा प्र. (प्रतिष्ठित थयेल) चिन्तामणिपार्श्वनाथनी स्तवना करी छे. श्रीचिन्तामणिपार्श्वनाथभगवान सं. १६५५मां तपगच्छ नायक पू. आ. श्रीविजयसेनसूरिजी म. चोमासा पछी कृष्णपुर-काळुपुर पधार्या हता. त्यारे तेमना शिष्यो पैकी केटलाकने स्वप्न आव्यु के तमे ढींगवावाडानी जमीन खोदावजो. जमीन खोदता तेमांथी श्यामवर्णनी श्रीचिन्तामणिपार्श्वनाथ भगवाननी प्रतिमा नीकळी. तेनुं नाम पूज्य श्रीओ श्रीविजयचिन्तामणिपार्श्वनाथ आप्युं. त्यारबाद सिकंदरपुरमा ज चातुर्मास करी एक भव्य जिनालयनिर्माणनो उपदेश आप्यो. श्रीसंघे विशाळ जिनालय बनाव्युं. सं. १६५६मां जे.सु. ५ ना दिवसे ते प्रतिमाजीनी आ.श्री सेनसूरिजी म.ना वरद हस्ते प्रतिष्ठा थई. __ अमदावादना शेठ शान्तिदास पं. मुक्तिसागरजीनी कृपाथी सुखी थया हता अने अमदावादना सूबा बन्या हता. वर्द्धमान अने शान्तिदासने गुरु म.ना मुखेथी जिनमन्दिरनिर्माणना फळने जाणी देरासर बंधाववानी इच्छा थई. सं. १६७८ मां जीर्णोद्धार शरु थयो. [श्लो. ४५ थी ४९] जोतजोतामां ६ मण्डप, ३ शिखर, ३ गभारा, ३ चोकीथी युक्त भव्य जिनालय ऊभुं थयु. जेनी आजुबाजु ५२ नानी देरीओ बनावी हती अने चतुर्मुख जिनालय हता. [श्लो. ५२, ५३] आ. जिनालय बनाववामां शेठे दीर्घदृष्टिथी काम लीधुं हतुं. मुस्लिमयुगमां जिनालयनी रक्षानुं काम विकट होई आक्रमण वखते प्रतिमाजीओने सरळताथी सुरक्षित स्थाने खसेडी शकाय ते माटे पोतानी हवेलीथी देरासर सुधी एक मोटी सुरंग बनावी दीधी. आ जिनालय 'वीरपाल' नामना (सोमपुरा) सलाटे बनाव्युं. [श्लो. ८४] सं. १६८२ मां (जे.व. ९ ना दिवसे) महो. विवेकहर्ष गणीनी अध्यक्षतामां महो. मुक्तिसागरगणिना हाथे परमात्मानी महोत्सवपूर्वक प्रतिष्ठा थई. [श्लो. ६०] ____ आ जिनालयना निर्माण-प्रतिष्ठाना कार्यमां शेठे ९ लाख रू. नो खर्च को हतो. जेनी नोंध सं. १८७०मां रचायेल शान्तिदास शेठना रासमां कवि Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

Loading...

Page Navigation
1 ... 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 ... 114