Book Title: Anusandhan 2008 09 SrNo 45
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
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सप्टेम्बर २००८
(७) तेमणे लखेल 'उपदेशमाळा - बालावबोध'नी प्रत मळे छे. (८) सं. १७८७ मां पाटणमां तेमणे 'अगडदत्त ऋषिनी चोपाई' बनावी छे. (४) भायखला - शेठ मोतीशाहे बनावेल आदीश्वर जिनालयना परिसरमां आवेल दादावाडीमां देरी नं.३मां सं. १८४० वर्षे महा सु. १३ बुधवारे प्रतिष्ठित थयेल 'पुण्यसागरसूरिजी 'नी पादुका छे. तेनो लेख नीचे मुजब छे : 'सं. १८४० वर्षे माह सुदि १३ शने (तेरसने) वार बुधे महमई बींदरे भट्टारक श्रीपुण्यसागरसू. समस्त प्रतिष्ठितम् ।
सत्यसौभाग्य
कर्ताओ प्रशस्तिमां श्लो. ४८ अने श्लो. ८५ मां पोताना गुरुनुं नाम 'श्रीसौभाग्य' जणाव्युं छे. ते कोण हता, कोना शिष्य हता ? ते जाणवा मळतुं नथी. वळी जैन गुर्जरकविओ भा. ४ - २५३, ३०४ उपर कर्तानो परिचय आपता तेमने ‘कल्याणसागर’ना शिष्य जणाव्या छे. तेथी कर्ता अने अनी गुरुपरम्पराशिष्यपरम्परा विषे वधु संशोधन करवुं पडे ओम लागे छे.
१७
'सं. १६८७ मां सर्वज्ञशतक- सटीक प्रमाणिक छे के नहीं ? आ बाबतमां राजसभामा जाहेर शास्त्रार्थ करवानी वात आवी त्यारे आ. राजसागरसूरिजी ओ पोताना पक्ष तरफथी शास्त्रार्थ करवा माटे पं. सत्यसौभाग्यगणिने नियुक्त कर्या हता.' [जैन परं इति भा. ३ पृ. ७४६]
प्रतिपरिचय
सूरत-म-विज्ञान - कस्तूरसूरि ज्ञानभण्डारमां झेरोक्ष रूपे सचवायेल संवेगी उपाश्रय (हाज पटेलनी पोळ) नी आ प्रत छे. ८ पाना छे. लेखनप्रशस्ति ( पुष्पिका) नुं पानुं नथी. दरेक पानामां लगभग ११ लीटीओ अने ३०-३५ अक्षर छे. पडिमात्रामां लखायेल आ प्रतिना अक्षर सुवाच्य छे.
लेखके ग्रन्थ प्रारम्भमां नमस्कार वखते पोताना गुरु सत्यसौभाग्यगणिने नमस्कार कर्या छे. तेथी कही शकाय के तेमना शिष्य परिवारमांथी कोईओ आ प्रत लखी हशे अथवा प्रतनी पुष्पिका सम्पूर्ण मळे तो तेनो निर्णय थइ शके.
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