Book Title: Anusandhan 2008 09 SrNo 45
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
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सप्टेम्बर २००८ .
उपा. लब्धिसागरजी
.
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(२)
(२) उपा. नेमीसागरजी राजसागरसूरिजी (३) (१) उपा. धर्मसागरजी-जीवर्षिगणिना शिष्य हता एवं महो. भावविजये
'षट्त्रिंशज्जल्प' ग्रन्थमां लख्युं छे. (जैन. परं.नो इति. भा.३, पृ. ६९७) परंतु महो. धर्मसागरजी पोते रचेल कल्पकिरणावली, प्रवचन परीक्षामां 'हीरविजयसूरिजी म. ने गुरु तरीके जणाव्या छे.. उपा. नेमिसागरजी अने आ. राजसागरसूरिजी सिरपुर (सिंहपुर)नगरना शेठ देवीदास अने तेनी पत्नी कोडमदेना पुत्र हता. तेमनुं गृहस्थ अवस्थानुं नाम 'नानजी' अने आचार्यश्री- 'मेघजी' हतुं. नेमिसागर गुरु निर्वाण रास ढाळ ९ कडी १२२ मां मुक्तिसागर गणिने (राजसागरसूरिजीने) तेमना मोटा भाई अने मानसागरमुनिने तेमना नाना भाई कह्या छे. जैन. परं.ना इति. पृ. ७५० उपर – 'उपा. धर्मसागरजीओ कोडिमदे अने तेना बन्ने पुत्रोने दीक्षा आपी उपा. लब्धिसागरना शिष्य बनाव्या. शाहजहांओ एमने 'वादिजीवक'- बिरुद आप्यु हतुं. तेमनो स्वर्गवास १६७४मां थयो. ते वखते तेमना माता हयात हता. तेवी नोंध छे. 'बाळपणथी तेजस्वी-बुद्धिशाळी हता, तेमने पद्मावती देवीनी सहाय हती' तेवी नोंध जैन परं.नो इति. भा.३ पृ. ७५१ उपर छे. बाळपणशिष्यपरम्परा-जीवन-काळधर्म वगेरे विशेष विगतो माटे तपा. सागरशाखाना हेमसौभाग्ये बनावेल 'राजसागरसूरिनिर्वाणरास' अने तिलकसागरे सं. १७२१ मां बनावेल 'राजसागरसूरिनिर्वाणरास' जोवा जोईओ. तेमना द्वारा रचायेल 'केवली स्वरूप स्तवन' कडी. ६८ मळे छे. अमदावाद - पं. प्र.वि.सं.मां रहेली 'हितोपदेश'नी प्रतमा 'मुक्तिसागरजी'ने तपगच्छमाथी काढी नाखवामां आव्या तेनी नोंध छे. [प्रशस्ति संग्रह पृ. १९०]
(३)
जा
आचार्य राजसागरसूरिजीनी शिष्य परम्परा जैन गुर्जर कविओ भा. ११०मां तेमना शिष्यादि द्वारा थयेल रचनाओने जोतां नीचे मुजब जोवा मळे छे.
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