Book Title: Anusandhan 2008 09 SrNo 45
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 67
________________ ६६ अनुसन्धान ४५ ॥ भाषा ॥ उत्तरदिसई दोइ दीपतां ए माल्हंतडि अष्टापद प्रासाद बीजु कल्याण त्रय तणु ए मा० चुमुखसिं लिइ वाद नालिमंडप मंडावीउ ए मा० सहसकूट गिरिराज प्रतिमां सह सवि पूजतां ए मा० सीझइं भवियण काज ॥२२।। दक्षिण दिसि नंदीसरू ए मा० सम्मेतसिहर विहार इम इम मंडप बारणइ ए मा० दोइ दोइ मूरति सार हस्त सिद्धि सुहगुरु तणी ए मा० दिनि दिनि धरणविहार वाधइ वंध्याचल समु ए मा० महिमंडलि सिणिगार ॥२३।। विदिसइं दो मुख दीपताए मा० महीधर च्यारि विहार पहिलुं चंपागर तणु ए अजिय सीमंधरसामि बीजु महादे करेविअ तिहिं संति नेमिकुमार त्रीजइ संघ खंभाइतु ए मा० वेचइं वित्त अपार ||२४|| थापि पासजिणेसरू ए मा० चउथइ तोल्हिइ साहि वीरजिणंद मंडाविउ ए मा० लीधु लछिनुं लाह तारणगढ गिरिनारवर मा० थंभण साचुर सामि जाणे ए अवतारिया ए मा० कि पंचतीरथ नामि ।।२५।। ए चिहुं पडिमा अट्ठवर माण तेतीस अंगुल अंग इग इग मंडप बारणइ ए मा० कुलगिरिनीय परिसार छन्नू जिण देहरी तणा ए मा० दीसइं सोभ संभार जाणे केलि खडोखली ए मा० तिहुअणजण सुहकार ॥२६।। सोलोत्तरसु मूलजिण मा० मंडप वीस उदार अठसट्ठि अधिकां त्रिणिसई ए मा० चउमुखि चउकी सार सिखरि सहस सात कलसा ए मा० पंनरसइं छन्नू थंभ पंचसई चउसठि पूतली ए मा० सोहइं जिम देवरंभ ॥२७॥ चउवीसासु तोरणां ए मा० कोरणीए अभिराम तिहुअणजण सोहामणीय मा० देखीय एहवं ठाम Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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