Book Title: Anusandhan 2008 09 SrNo 45
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 12
________________ सप्टेम्बर २००८ अमदावादमां पोतानुं स्वतन्त्र देरासर अने ज्ञानभण्डार बनाव्या हता. प्रशस्तिकारे पण 'चित्कोशं प्रतिमागृहं च तुलया मुक्तं मुदा योऽव्यधात्' [श्लो. २६] पदथी तेमना आ गुण तरफ अंगुलिनिर्देश कर्यो छे. (I) तेमना द्वारा लखावायेल ग्रन्थोमांथी केटलाक ग्रन्थो प्राप्त छे. आ ग्रन्थनी लेखन प्रशस्तिमा प्रायः घणे स्थाने तेमना बन्ने पुत्रना नाम छे, ते परथी कही शकाय के तेमणे आ कार्य (ग्रन्थभण्डार) बन्ने पुत्रोनां जन्म पछी ज कर्यां हशे.' (II) आ ग्रन्थो हाल सूरत-आगरा-लींबडीपूना-अमदावादनां ज्ञानभण्डार/पुस्तकालयमा छे जेथी कही शकाय छे तेमना वंशजोए जुदा जुदा प्रसंगोए उपरना भण्डार वगेरेने ग्रन्थो आप्या हशे. बाकीनो संग्रह तेमना ज नामथी हाल 'लालभाई दलपतभाई विद्यामन्दिर (L.D.) मां सुरक्षित छे.' - आ बन्ने नध जैन परं. इति. भा.४, पृ. १२३/१२४ पर छे. (६) जैन परं. इति. भा.४ पृ. १२४ उपर तेमनुं बीजुं नाम 'कुंअर' कर्तुं छे. (७) जैन परं. इति. भा.४ पृ. १२४ उपर तेमनुं बीजुं नाम 'सौभाग्यदे' ___ कडुं छे. (८) वर्द्धमानना जीवननो विशेष कोई परिचय प्राप्त थतो नथी. परंतु उदार मनोवृत्तिवाळा ते पांच तिथिना पौषध करवा, सच्चित्तआहारनो त्याग, ब्रह्मचर्य- पालन, वगेरे नियमनुं पालन करवावाळा हता. अने तेमणे सम्यक्त्व सहित श्रावकना १२ व्रत पण ग्रहण कर्या हता. [श्लो. ३३, ३४] जैन परं. इति. भा.४ पृ. १२४ उपर विशेष नोंध-शेठ शान्तिदासे ज्यारे चिन्तामणि पार्श्वनाथ भगवाननु नवु जिनालय बनाव्युं त्यारे तेना दरेक काम तेमना भाई वर्द्धमाननी देखरेख नीचे थया हता. शेठ शान्तिदासना जीवन-सत्कार्योनी नोंध आपता ग्रन्थो-आधारस्थळो सारा प्रमाणमां मळे छे. जेवा के शान्तिदास शेठनो रास, जैन परं.नो इतिहास भा.३-४, गुजरात, पाटनगर (ले. रत्नमणिराव जोटे), अमदावादनो इतिहास (ले. मगनलाल वखतचंद जोशी), प्रतापी पूर्वजो Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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