Book Title: Agam 45 Anuogdaraim Beiya Chuliya Mulam PDF File
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar

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Page 28
________________ तत्थ णं जे से एक्के पंचगसंजोए से णं इमे अत्थि नामे उदइए उवसमिए खइए खओवसमिए पारिणामियनिप्फन्ने | कयरे से नामे उदइए जाव पारिणामियनिप्फन्ने ? उदइए त्ति मणस्से उवसंता कसाया खइयं समत्तं खओवसमियाइं इंदियाइं पारिणामिए जीवे, एस णं से नामे उदइए जाव पारिणामियनिप्फन्ने, से तं सन्निवाइए से तं छनामे | [१६४] से किं तं सत्तनामे ? सत्तनामे- सत्त सरा पन्नत्ता तं जहा :- | [१६५] सज्जे रिसभे गंधारे मज्झिमे पंचमे सरे । धेवए चेव नेसाए सरा सत्त वियाहिया ।। [१६६] एएसिं णं सत्तण्डं सराणं सत्त सरहाणा पन्नत्ता तं जहा:- | [१६७] सज्जं च अग्गजीहाए उरेण रिसभं सरं । कंठग्गएण गंधारं मज्झजीहाए मज्झिमं ।। [१६८] नासाए पंचमं बूया दंतोटेणं य धेवतं । भमुहक्खेवेण नेसाहं सरट्ठाणा वियाहिया ।। [१६९] सत्त सरा जीवनिस्सिया पन्नत्ता तं जहा:- | [१७०] सज्जं रवइ मयूरो कुक्कुडो रिसभं सरं । हंसो रवइ गंधारं मज्झिमं तु गवेलगा ।। [१७१] अह कुस्मसंभवे काले कोइला पंचमं सरं । छटुं च सारसा कुंचा नेसायं सत्तमं गओ ।। [१७२] सत्त सरा अजीनिस्सिया पन्नत्ता तं जहा:- | [१७३] सज्ज रवइ मुयंगो गोमुही रिसभं सरं । सत्तं-१७३ संखो रवइ गंधारं मज्झिमं पुण झल्लरी ।। [१७४] चउचलणपइट्ठाणा गोहिया पंचमं सरं । आडंबरो धेवइयं महाभेरी य सत्तमं ।। [१७५] एएसि णं सत्तण्डं सराणं सत्त सरलक्खणा पन्नत्ता तं जहा:- | [१७६] सज्जेण लहइ वित्तिं कयं च न विनस्सइ । गावो पुत्ता य मित्ता य नारीणं होई वल्लहो ।। [१७७] रिसभेण उ एसज्जं सेनावच्चं धनानि य । वत्थगंधमलंकारं इत्थीओ सयणाणि य ।। [१७८] गंधारे गीतजुत्तिण्णा विज्जवित्ती कलाहिया । हवंति कइणो पण्णा जे अन्ने सत्थपारगा ।। [१७९] मज्झिमसरमंता उ हवंति सुहजीविणो | खायई पियई देई मज्झिमसरमस्सिओ ।। [१८०] पंचमसरमंता उ हवंति पुहवीपती । सूरा संगहकत्तारो अनेगगणनायगा ।। [१८१] धेवयसरमंता उ हवंति दुहजीविणो । दीपरत्नसागर संशोधितः] [27] [४५-अनुओगदाराइं]

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