Book Title: Agam 45 Anuogdaraim Beiya Chuliya Mulam PDF File
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar

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Page 37
________________ [२६५] से किं तं परमाणू ? परमाणू दुविहे पन्नत्ते, तं जहा- सुहूमे य ववहारिए य, तत्थ णं जे से सुहुमे से ठप्पे, तत्थ णं जे से ववहारिए से णं अनंतानंताणं सुहमपोग्गलाणं समुदय समिति-समागमेणं ववहारिए परमाणुपोग्गले निप्फज्जइ, से णं भंते! असिधारं वा खुरधारं वा ओगाहेज्जा ?, हंता ओगाहेज्जा | से णं तत्थ छिज्जेज्ज वा भिज्जेज्ज वा ? नो इणढे समढे, नो खलु तत्थ सत्थं कमइ, से णं भंते! अगनिकायस्स मज्झंमज्झंणं वीइवएज्जा ?, हंता वीइवएज्जा, से णं भंते! तत्थऽज्झेज्जा ?, नो इणढे समढे, नो खलु तत्थ सत्थं कमइ । से णं भंते! पुक्खरसंवगट्टगस्स महामेहस्स मज्झमज्झे णं वीइवएज्जा ?, हंता वीइवएज्जा । से णं त्तथ उदउल्लेसिआ ? नो इणढे समढे, नो खलु तत्थ सत्थं कमइ । से णं भंते! गंगाए महानईए पडिसोयं हव्वमागच्छेज्जा ?, हंता हव्वमागच्छेज्जा, से णं तत्थ विनिघायमावज्जेज्जा ?, नो इणढे समढे, नो खलु तत्थ सत्थं कमइ । से णं भंते! उदगावत्तं वा उदगबिंदु वा ओगाहेज्जा ?, हंता ओगाहेज्जा, से णं तत्थ कुत्थेज्जा वा परियावज्जेज्ज वा ? नो इणढे समढे, नो खलु तत्थ सत्थं कमइ । [२६६] सत्थेण सुतिक्खेण वि छेत्तुं भेत्तुं च जं किर न सक्का | तं परमाणुं सिद्धा वयंति आई पमाणाणं ।। [२६७] अनंताणं वावहारियपरमाणुपोग्गलाणं समुदय-समिति-समागमेणं सा एगा उसण्हसण्हिया इ वा सण्हसण्हिया इ वा उड्ढरेणू इ वा तसरेणू इ वा रहरेणू इ वा, अट्ठ उसण्हसण्हियाओ सा एगा सण्हसण्हिया, अट्ठ सहसण्हियाओ सा एगा उड्ढरेणू, अट्ठ उड्ढरेणूओ सा एगा तसरेणू, अट्ठ तसरेणूओ सा एगा रहरेणू, अट्ठ रहरेणूओ देवकुरु-उत्तरकुरुगाणं मणुस्साणं से एगे वालग्गे, अट्ठ देवकुरुउत्तरकुरुगाणं मणुस्साणं वालग्गा हरिवास-रम्मगवासाणं मणुस्साणं से एगे वालग्गे, अट्ठ हरिवस्सरम्मगवासाणं मणुसाणं वालग्गा हेमवय-हेरण्णवयाणं मणुस्साणं से एगे वालग्गे, अट्ट हेमवयहेरण्णवयाणं मणुस्साणं वालग्गा पुव्वविदेह-अवरविदेहाणं मणुस्साणं से एगे वालग्गे, अट्ठ पुव्वविदेहेसुत्तं-२६७ अवरविदेहाणं मणुस्साणं वालग्गा सा एगा लिक्खा | अट्ठ लिक्खाओ सा एगा जूया, अट्ठ जूयाओ से एगे जवमझे, अट्ठ जवमज्झा से एगे उस्सेहंगुले, एएणं अंगुलप्पमाणेणं छ अंगुलाई पादो, बारस अंगुलाई विहत्थी, चउवीसं अंगुलाई रयणी, अडयालीसं अंगुलाई कुच्छी, छन्नउई अंगुलाई से एगे दंडेइ वा धणू इ वा जुगे इ वा नालिया इ वा अक्खे इ वा मुसले इ वा, एएणं धनुप्पमाणेणं दो धनुसहस्साई गाउयं, चत्तारि गाउयाइं जोयणं, एएणं उस्सेहंगुलेणं किं पओयणं? एएणं उस्सेहंगुलेणं नेरइयतिरिक्खजोणिय-मणुस्स-देवाणं सरीरोगाहणाओ मविज्जति । नेरइयाणं भंते! केमहालिया सरीरोगाहणा पन्नत्ता ? गोयमा दुविहा पन्नत्ता तं जहाभवधारणिज्जा य उत्तरवेउवविया य, तत्थ णं जा सा भवधारणिज्जा सा जहन्नेणं असंखेज्जइभागं उक्कोसेणं पंच धनुसयाई, तत्थ णं जा सा उत्तरवेउव्विया सा जहन्नेणं अंगुलस्स संखेज्जइभागं उक्कोसेणं धनुसहस्सं । रयणप्पभापुढवीए नेरइयाणं भंते! केमहालिया सरीरोगाहणा पन्नत्ता ? गोयमा! दुविहा, तं० भवधारणिज्जा य उत्तरवेउव्विया य, तत्थ णं जा सा भवधारणिज्जा सा जहन्ने दीपरत्नसागर संशोधितः] [36] [४५-अनुओगदाराइं]

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