Book Title: Agam 03 Thanam Angsutt 03 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 101
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra १२ www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir राणं For Private And Personal Use Only - ४/४/३९५ गसमाणा १३६४-364 ( ३९६ ) चउच्चिहा संसारसमावण्णगा जीवा पन्नत्ता तं जहा -नेरइया तिरिक्खजोणिया मणुस्सा देवा चउव्विहा सच्वजावा पन्नत्ता तं जहा-मणजोगी बइजोगी कायजोगी अजोगी अहवा - चउव्हिा सव्वजीवा पन्नत्ता तं जहा - इस्थिवेयगा पुरिसवेयगा नंपुसकवेयगा अवेयगा अहवा चउव्विहा सव्वजावा पन्नत्ता तं जहा- चक्खुदंसणी अचक्खुदंसणी ओहिदसणी केवलदंसणी अहवा - चउच्चिहा सव्वजीवा पन्नता तं जहा संजया असंजया संजयासंयजा नोसंजया नोअसंजया | ३६५/- 365 ( ३९७) चत्तारि पुरिसजाया पन्नता तं जहा मित्ते नाममेगे मित्ते मित्ते नाममेगे अमित्ते अमित्ते नाममेगे मित्ते अमित्ते नाममेगे अमित्ते चत्तारि पुरिसजाया पन्नत्ता तं जहा - मित्ते नाममेगे मित्तरूवे पित्तं नामभेगे अमित्तरूवे अमित्ते नाममेगे मित्तरूवे अमित्ते नाममेगे अमित्तरूवे चत्तारि पुरिसजाया पन्नत्ता तं जहा-मुत्ते नाममेगे मुत्ते मुत्ते नाममेगे अमुत्ते अमुत्ते नाममेगे मुत्ते अमुत्ते नाममेगे अमुत्ते चत्तारि पुरिसजाया पन्नता तं जहा-मुत्ते नाममेगे मुत्तरूवे मुत्ते नामयेगे अमुत्तरूवे अमुत्ते नाममेगे मुत्तरूवे अमुत्ते नाममेगे अमुक्तरूवे ॥३६६/-386 ( ३९८ ) पंचिदियतिरिक्खजोणिया चउगइया चउआगइया पन्नत्ता तं जहा पंचिदियतिरिक्खजोणिए पंचिदियतिरिक्खजोणिएसु उववज्रपाणे नेरइएहिंतो वा तिरिक्खजोणिएहिंतो वा मणुस्सेहिंती वा देवेहिंतो वा उववज्जेज्जा से चेव णं से पंचिदियतिरिक्खजोणिए पंचिंदियतिरिक्खजोणियत्तं विप्पजहमाणे नैरइयत्ताए वा तिरिक्खजोणियत्ताए वा पणुस्सत्ताए वा देवत्ताए वा गच्छेजा मणुस्सा चउगइया चउआगइआ [ पन्नत्ता तं जहा मणुस्से मस्सु उववज्रमाणे नेरइएहिंतो वा तिरिक्खजोणिएहिंतो वा मणुस्सेहिंतो वा देवेहिंतो वा उववज्जेज्जा से चैव णं से मणुस्से मणुस्सतं विप्पजहमाणे नेरइयत्ताए वा तिरिक्खजोणियत्ताए वाम सत्ताए वा देवत्ताए वा गच्छेजा ] | ३६७/-367 (३९९) चेंइदिया णं जीवा असमारभमाणस्स चउव्विहे संजमे कज्जति तं जहा जिब्मामयातो सोखातो अववशेवित्ता भवति जिदमामएणं दुक्खेणं असंजोगेत्ता भवति फासा - मयातो सोक्खतो अववरोवेत्ता भवति फासामएणं दुक्खेणं असंजोगिता भवति बेइंदिया जं जीवा समारभमाणस्स चउविधे असंजमे कजति तं जहाजिन्भाभयातो सोक्खातो ववरोवित्ता भवति जिममएणं दुक्खेणं संजोगिता भवति फासामयातो सोक्खातो ववशेवेत्ता भवति फासामएणं दुक्खेणं संजोगित्ता भवति ॥ ३६८] 368 (४००) सम्मद्दिट्ठियाणं नेरइयाणं चत्तारि किरियाओ पन्नत्ताओ तं जहा- आरंभिया पारिग्गहिया मायावत्तिया अपचक्खाणकिरिया सम्मद्दियिाणमसुरकुमाराणं चत्तारि किरियाओ पन्नताओ तं जहा आरंभिया पारिग्गहिया मायावत्तिया अपचक्खाणकिरिया एवं - विगलिंदियवज्रं जाव वैमाणियाणं | ३६९/- 369 (४०१) चउहिं ठाणेहिं संते गुणे नासेज्जा तं जहा कोहेणं पडिनिवेसेणं अकयण्णुयाए मिच्छत्ताभिनिवेसेणं चउहिं ठाणेहिं असंते गुणे दीवेज्जा तं जहा अव्यासवत्तियं परच्छंदाणुवत्तियं कहेउं कतपडिकतेति वा । ३७०/-370 (४०२ ) नेरइयाणं चउहिं ठाणेहिं सरीरुप्पत्ती लिया तं जहा कोहेणं माणेणं मायाए

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