Book Title: Surya Sahasra Nam Sangraha Trayam
Author(s): Dharmdhurandharsuri
Publisher: Jain Vidya Shodh Samsthan
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________________ श्रीसूर्यसहस्रनामसङ्घात्रयम् "तेजसांपति:" 1018 इति / तेजसां-प्रभावाणां पति:-स्वामी॥१०१८॥ "तेजसांनिधिः" 1019 इति / तेजसां-दीप्तीनां निधि:-आधारभूतः / 'सर्वतेजोनिधिः सूर्यः / / ' इति पुराणोक्तेः // 1019 / / "तेजस्वी" 1020 इति / तेज:-प्रकाशो विद्यते यस्य स तथा // 1020 // "तेजोनिधिः", 1021 इति / तेजांसि-वीर्याणि, तेषां निधि:-आकरः। 'तेजो दीप्तौ प्रभावे च स्यात् पराक्रम-रेतसोः / / ' इति मेदिनीकारः॥ .. "तेजोराशिः" 1022 इति / तेजसौं-प्रकाशानां राशि:-समूहो यस्मिन् स तथा // 1022 // "तेजोनिलयः" 1023 इति / तेजसां-पुण्यानां निलय:-गृहम् / "सुकृतेऽपि भवेत् तेजः // " इति मेदिनिः // 1023 / / "तीव्रः" 1024 इति / तीव्र:-दुःसहप्रतापः // 1024 // "तीक्ष्णदीधिति:" 1025 इति / तीक्ष्णा दीधितपः-किरणा यस्य स तथा // 1025 / / "तीर्थम्" 1026 इति / तीर्यते संसारसागरमनेनेति तीर्थम् / सर्वेषां धर्मोपदेशकत्वेन तीर्थं गुरुरिति वा / 'निपाना-ऽऽगमयोस्तीर्थमृषिजुष्टजले गुरौ // ' इत्यमरः // 1026 // “तिग्मांशुः" 1027 इति / तिग्मा:-तीक्ष्णाः अंशव:-किरणा यस्य स तथा // 1027 // “तिमिस्रहा" 1028 इति / तिमिस्रम्-अन्धकारं हन्तीति तथा / / 1028|| "तमः" 1029 इति / विषयवासितान्त:करणानां हृदि तद्रूपतयाऽपरिस्फुरणात् तम: तमोरूप इत्यर्थः // 1029 / / "तमोहरः" 1030 इति / तमः अर्थादज्ञानं हरतीति तथा // 1030 // "तमोनुदः" 1031 इति / तम:-पापं नुदति-प्रेरयति स तथा // 1031|| 145
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