Book Title: Shastra Sandesh Mala Part 08
Author(s): Vinayrakshitvijay
Publisher: Shastra Sandesh Mala

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Page 317
________________ // 16 // // 17 // // 18 // // 19 // // 20 // // 21 // पुव्वविदेहे सीमंधरसामी विहरमाणतित्थयरो। . अवरविदेहे जुगमंधरसामी मम सिवं दिसउ मुक्खपहं पयडंतो बाहुजिणिदो तहा सुबाहू य / अनेवि अरहंता हरंतु दुरिआई विहरंता नंदीसरअट्ठावयसत्तुंजयउज्जयंतसम्मे। पमुहाई अहं वंदे तित्थाई परमभत्तीए सासयजिणालयाई असासयाई पि जाई सव्वाई। उड्ढमहतिरियलोए तेसिं पणमामि भावेणं ' अड्ढाइज्जा दीवा पन्नरस तेसु कम्मभूमीओ। जे के वि तत्थ साहू पंचमहव्वयधरा धीरा अट्ठारससीलंगसहस्सधुराधरणलद्धमाहप्पा। कंदप्पदप्पदलणा तेसिं चलणा सुहं दितु ' सिद्धंतसुत्तहारो पयडियवरचरणकरणववहारो / भवियाण भवभयहरो. सिरिगोयमगणहरो जयइ सिरिपुंडरीयगोयमपमुहा गणहारिणो महामुणिणो। तिहुयणपणमियचरणा सरणं मम मोहनिट्ठवणा भरहो सणंकुमारो सगरो मघवं जओ य हरिसेणो। तह सुपरमो य सत्त वि चक्कवईमुणिवई सरणं तिव्वतवखग्गखंडियभवपायववियडपयडियपहावा / सरणं नव बलदेवा वरगुणरयणायरा मज्झ भरहाईण मुणीणं गुणगारववण्णणेण पावमलं / पक्खालेमि य सव्वं पवित्ततित्थोदएणं व विहियं वेयावच्चं विहिणा साहूण सुद्धसीलाण / सिरिरिसहसुओ भरहो जाओ भरहाहिवो तेणं 308 // 22 // // 23 // // 24 // // 25 // // 26 // - // 27 //

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