Book Title: Prakrit Vidya 2001 07
Author(s): Rajaram Jain, Sudip Jain
Publisher: Kundkund Bharti Trust

View full book text
Previous | Next

Page 5
________________ अनक्रम क्र. शीर्षक - लेखक पृष्ठ सं० 01. मंगलाचरण : कुंदकुंद-वचनामृत मिश्रीलाल जैन एडवोकेट 02. सम्पादकीय : डॉ० सुदीप जैन 03. 'समयपाहुड' बदलने का दुःसाहस पूर्ण उपक्रम डॉ० देवेन्द्रकुमार शास्त्री 04. दक्षिण भारत में सम्राट चन्द्रगुप्त से पूर्व भी डॉ० सुदीप जैन ___जैनधर्म का प्रचार-प्रसार था 05. 'छक्खंडागमसुत्त' की 'धवला' टीका के डॉ० उदयचन्द्र जैन प्रथम पुस्तक के अनेकार्थ-शब्द 06. भारतीय संस्कृति को तीर्थंकर ऋषभदेव की देन । पद्मभूषण आचार्य बलदेव उपाध्याय 32 07. आत्मजयी महावीर आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी 08. भारतीय संस्कृति में गाय डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल 09. मांसाहार : एक समीक्षा आचार्य महाप्रज्ञ 10. प्राकृत-ग्रंथों में जिन-साधुओं का निवास और डॉ० राजेन्द्र कुमार बंसल . ____ विहार-चर्या का स्वरूप 11. 'ब्राह्मी' लिपि और जैन-परम्परा डॉ० रवीन्द्र कुमार वशिष्ठ 52 12. लिपिशालासंदर्शनपरिवर्तो दशम: 13. श्रवणबेल्गोला के अभिलेखों में वर्णित बैंकिंग प्रणाली श्री बिशनस्वरूप रुस्तगी 14. जैनधर्म का तत्त्व-चिन्तन : ग्रीक-दार्शनिक प्रो० प्रेमसुमन जैन प्रो० हाजिमे नाकामुरा' की दृष्टि में । '15. ओंकार महामंत्र और उसका प्रभाव आचार्य राजकुमार जैन 16. श्री सम्मेदशिखर अष्टक विद्यावारिधि डॉ० महेन्द्र सागर प्रचंडिया 74 17. शब्द-स्वरूप एवं ध्वनि-विज्ञान डॉ० माया जैन 18. शाकाहारियों के लिये ब्रिटेन में बीमा सस्ता होगा 19. रावण नहीं फूंका जायेगा अब दशहरे पर सुरेशचन्द्र सिन्हा 20. गधों से गधे की तरह काम लेने पर रोक : 8 घंटे की ड्यूटी तय 21. जैन आगम-साहित्य में प्रतिपादित श्रमणों के मूलगुण डॉ० जिनेन्द्र जैन 22. विदिशा के बड़े जैन मन्दिर के कुछ मूर्ति-लेख कुन्दन लाल जैन 23. यूनीकोड ने देवनागरी के 'हलंत' को विराम' बना दिया विनोद वार्ष्णेयी 24. खण्डहरों का वैभव डॉ० रमेशचंद जैन 25. पुस्तक-समीक्षा 26. अभिमत 27. समाचार-दर्शन प्राकृतविद्या जुलाई-सितम्बर '2001 003

Loading...

Page Navigation
1 ... 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 ... 116