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व्यंतर
५. मध्यलोक में ग्यन्तरो व भवनवासियोंके निवास
ति./४/गा, नं०
ति प
४/गा
२५
७७
८६
१४०
१४३
१६४
२०५
१६५४
१६६३
中学
१७१२
१७२६
१७३३
१७४५
рово
१७६८
१६०२-१६०० पद्म
१८४३
१८४७
१८५१
१६१७
१६८४
१६६४
जम्बूद्वीपको
जगतीका महोरग
अभ्यन्तर भाग
उपरोक्त जगतीका विजय द्वारके विजय ऊपर आकाश में
उपरोक्त ही अन्य द्वारोपर अन्य देव विजया दोनो पा अभियोग्य उपरोक्त श्रेणीका दक्षिणोत्तर सौधर्मेंद्र के वाहन
भाग
वार्थ के कूट
वृषभ गिरिके ऊपर हिमवान्तके १० फूट
२०५३
२०५८
२०६१
२०८४
पद्म हदके
कूट
पद्म हृदके जल में स्थित कूट
२०१२
२०६६ २१०३-२१०८
हरि क्षेत्र में विजयवान् नाभिगिरि चारण
निषेध पर्वतके आठ कूट निषेध पर्वत तिहि व्यतर बाह्य ५ कूट १८३६-२०१६ सुमेरु पर्वतापवनको लोकपाल पूर्व दिशा
सोम
उपरोक्त वनकी दक्षिण दिशा
पश्चिम
स्थान
हैमवत क्षेत्रका शब्दवान् पर्वत
महाहिमवान् पर्वतके ७ कूट
महापद्म के बाह्य ५ कूट
יי
"
"
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११
१६६८
उपरोक्त वनका बलभद्र कूट २०४२ २०४४ सौमनस गज कूट गजदन्तके ६
"
उपरोक्त वनका बलभद्र कूट सुमेरु पर्वतके नन्दन नेमकी
चारो दिशाओ
11
उत्तर
"1
की वापियोके
चहुँ ओर ९६४३-१६४६] सुमेरु पर्वत के सौमनस पनकी उपरोक्त
चारो दिशाओ में
लोकपाल
गिजदन्त फूट
गन्धमादन गजदन्तके ६ कूट . ८ कूट
माल्यवान 19
देव कुरुके २ यमक पर्वत देवकुरुके १० होने कमल
देवकुल काचनप
देव
दिग्गज पर्वत
अन्तर
वृषभ
सौधर्मेंद्र के परिवार
यम
वरुण
कुबेर
देव
बलभद्र
उपरोक्त लोकपाल
उतर
नगर
नगर
व्यतर सपरिवार श्री भवन देवी
शाली
11
फूटोके नाममाले नगर
व्यंतर
नगर
20
४
भवन
कूटोके नामवाले नगर
नगर
वलभद्र टोके नामवाले देव
पर्वतके नाम होके नामवारी
२११३ अनादि २१२४
नगर
काचन
यम (वाहनदेव)
नगर
श्रेणी
99
भवन
भवन
नगर
बाले देव वाहनदेव
२१३१-२१३५ उत्तर दि
भवन २१५८-२१६० देवकुरुमें शाल्मली वृक्ष व सपरिवार वेणु उसका परिवार
उत्तरकुरु सपरिवार जवृक्ष
भवन
11
35
पुर
४ भवन
39
भवन
पुर
31
"
व
६१३
"
वि.प./
४ / गा.
11
२१६७
२२६६-२३०३ २३०६ - २३११
२३२६
२३३०
२३३६
२३४३
२३५१ २३५६
२६
२३१५- २३२४ पूर्व व अपर विदेहके मध्य व पूर्व पश्चिम स्थित देवशरण्यक
२४५६
우상들은
२४७३ - २४७६
२५३६
२०१६
२७७५
ति. प./५/
गा. ७६.८१
१२५ १३८
१७०
स्थान
देवकुरुके दिग्गज पर्वत उत्तर कुरुके २ यमक
१८०
२०६
२३६
४. व्यंतर लोक निर्देश
व भूतारण्यक वन नील पर्वत के आठ कूट
रम्यक क्षेत्रका नाभि गिरि
रुक्मि पर्वत ७ कूट
हैरण्यवत क्षेत्रका नाभिगिरि
देव
विदेहके कच्छा देशके विजयार्थ बाहनदेव के आठ कूट
वरुण (वाहन देव) भवन पर्वतके नाम
[इसी प्रकार शेष २९ विजया]
विदेहके आठ वक्षारोके तीन- व्यंतर तीन कूट
युगता सपरिवार
रुचकवर
पर्वतकी दिशाओमे चार कूट असख्यात द्वीप समुद्र जाकर द्वितीय जम्बूद्वीप पूर्वदिशा के नगर के प्रासाव
जैनेन्द्र सिद्धान्त कोश
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आदर - अनादर
खोधर्मेन्द्रका
परिवार
कूटोके नामवाले
प्रभास
कूटोंके नामवाले (भरत)
शिखरी पर्वतके १० फूट
ऐरावत क्षेत्र के विजयार्थ पभ
गिरि आदि पर
२४४६ - २४५४ लवण समुद्रके ऊपर आकाश में वेलंधर व भुजग नगर
स्थित ४२००० व २८००० नगर उपरोक्त हो अन्य नगर सणसमुझमे स्थित आठपट लवणसमुद्रमे स्थित मागध व प्रभास द्वीप
मागध
प्रभास
धातकी खण्डके २ इष्वाकार व्यतर पोटीन-तीन कूट
सर्व पर्वत आदि मानुषोर पर्वत १८ कूट
देव
बेघर
नन्दीश्वर द्वीपके ६४ वनोमेसे व्यतर प्रत्येक में एक-एक भवन कुण्डलगिरि १६ फूट कुण्डल गिरिडी चारों दिशाओ में ४ कूट
11
विजय आदि देव
विजय अशोक
२३७
दक्षिणादि दिशाओ मे
वैजयतादि
ति प /५/ सब द्वीप समुद्रोके उपरिम भाग उन उनके स्वामी
५०
कूटोके नामवाले कुण्डलद्वीप के अधिपति
चारो चार दिग्गजेन्द्र
भवनादि
19
::
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11
19
११
नगर
भवन
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31
भवन
91
09
11
भवन
नगर
आवास
नगर
भवन
19
नगर
नगर
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