Book Title: Heervijay Suri Jivan Vruttant
Author(s): Kanhaiyalal Jain
Publisher: Atmanand Jain Tract Society

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Page 17
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir [१२] ( ३४ ) फिर # स्वजन्म दिन औ नवरोजे औ जब जब आवे रविवार, तब २ को अकबर ने सुखमद किया अहिंसा धर्म प्रचार | कुछ दिन फिर अकबर ने ऐसे निश्चित किए सुमंगल धाम, जिल में हत्या करने वाले का हो प्राणदण्ड परिणाम | (३५) तद् विषयक फ़रमानों का सम्पूर्ण देश में हुआ प्रचार, 1 'विजय प्रशस्ति' 'बदाऊनी' भी इसको करते हैं स्वीकार । अब तक यह फरमान सुरक्षित कहीं कहीं पाए जाते, मुसलमान कालीन जैन की स्थिति जो अब तक बतलाते । ( ३६ ) 6 पाठकगण ! उन के पढ़ने से होता है असीम आमोद, निम्नांकित सारांश उसी का देते हैं - हो मनो विनोद | जाने सभी हमारा इस में सतत मोद और उद्देश, शुभकृति - शान्ति सुविस्तृत हो भगजावें और निशाचर क्लेश ॥ (C * अकबर का अपना जन्मदिन | विजय प्रशस्ति सार के कती और बदाऊनी प्रसिद्ध ऐतिहासिक भी ऐसे फरमानों का जारी होना मानते हैं । For Private And Personal Use Only

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