Book Title: Devki Shatputra Ras
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 15
________________ (१४) ए गृहस्थोनो आचार रे लाल ॥ नेम ॥ ११॥ ॥दोहा॥ ॥नगर मध्ये थश्नीकल्या,साथे बहु परिवार नेम जिणंद जिहां समोसस्या, चाव्या तिणहीज गर॥१॥ ॥ ढाल श्रामी॥ ॥धजा ने पताका हो दीग राणी देवकी रे,प्रनु अतिशयनी वात॥विनय तोश्रादरी होउत्तम साधुनो रे, ए तो जगत विख्यात॥१॥सांसो निवारो हो प्रजु नेमजी रे ॥ ए आंकणी ॥ रथने उपरथी हो हेठे उतरी रे, दासीई ने परिवार॥पायने अणुयाणे हो राणी देवकी रे, साचवी अनिगम सार ॥ सांसो ॥२॥देश प्रदक्षिणा हो वांद्या नेमजी रे, पांचे अंग नमाय ॥ दो गुमा दो ढिंचण हो नूतले थापीने रे, मस्तक चूंश लगाय ॥ सांसो ॥३॥ गए मुनि देखी हो संशय उपनो रे, हुँ एम थरे उदास ॥ सांसों तो निवारण हो कारण श्रावीया रे, नेम जिणेसर पास ॥ सांसो ॥४॥ गुण अनंता हो प्रजुजी तुम तणा रे, जो होये जीनकी अनेक ॥ राग केष बेहुने होस्वामी निवारीया रे, सहु माथे मन एक ॥सांसोग ॥५॥धन्य दिवस हो धन्य वेला घमीरे,नेट्या तरण Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org


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