Book Title: Chari Palak Padyatra Sangh
Author(s): Rajhans Group of Industries
Publisher: Rajhans Group of Industries

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Page 106
________________ प्रभु ए विनंति.... प्रभु ए विनंति हवे तो स्वीकारो, नथी गमतुं भवमां हवे तो उगारो, कदी क्रोधना तो वादल चढे छे; समजना सूरजने ते आवरे छे... समीर थई क्षमाना हवे तो पधारो... कदी मान हाथी आवी चढे छे; विनयना शिखरथी गबडावी दे छे... समर्पणनी सरगम बनीने पधारो... कदी तो कपटना कांटा उगे छे; निखालस विचारोना फूलो वींधे छे... माली बनीने हवे तो पधारो... लालसानो सागर तूफाने चढे छे; Jain Education International तप अने त्यागना वाहणो डूबे छे... सुकानी बनीने हवे तो पधारो.... आत्मकमलमां जो तूं पधारे; जीवननी नैया पहोंचे किनारे... करुणा करीने हवे तो पधारो... छेल्ली विनंति प्रभुजी तमोने; विसारीना देशो भक्तजनोने... श्वासोनी धडकन बनीने पधारो... For Personal & Private Use Only प्रभु० १ प्रभु० २ प्रभु० ३ प्रभु० ४ प्रभु० ५ प्रभु० ६ प्रभु० ७ www.jainelibrary.org

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