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डिसेम्बर २०१०
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अहीं तो मात्र आ बाबत तरफ ध्यान दोरवा पुरतां आटलां दृष्टान्तो आप्यां छे.
छेवटे, तेमणे रचेला मुख्य मुख्य ग्रन्थोना नामाभिधान साथेनो तेमने अंजलिरूप श्लोक छे (धूमकेतु, १९८२, पृ. १६६) तेनी 'बद्धं येन न केन केन विधिना मोहः कृतो दूरतः' आ छेल्ली पंक्ति नोंधीने, आ महामानवने अंजलिरूप आ लेख पूरो करुं छु.
C/o. १, B, कामधेनु एपार्टमेन्ट,
___ सुदामा शेरी, जामनगर-८