Book Title: Agam 13 Upang 02 Rajprashniya Sutra Shwetambar
Author(s): Purnachandrasagar
Publisher: Jainanand Pustakalay
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दससु भद्दासणसाहस्सीसु निसीयंति, तए णं तस्स सूरियाभस्स देवस्स दाहिणपच्चस्थिमेणं बाहिरियाए परिसाए बारस देवसाहस्सीतो || बारससु भदासणसाहस्सीसु निसीयंति, तए णं तस्स सूरियाभस्स देवस्स पच्चत्थिमेणं सत्त अणियाहि वइणो सत्तहिं(सु)भदासणेहिं(सु)णिसीयंति, तए णं तस्स सूरियाभस्स देवस्स चउद्दिसिं सोलस आयरक्खदेवसाहस्सीओ सोलसहि भद्दासणसाहस्सीहिं णिसीयंति, तं०-पुरच्छिमिल्लेणंचनारि साहस्सीओ दाहिणेणं चत्तारि साहस्सीओ पच्चत्थिमेणं चत्तारि साहस्सीओ/ उत्तरेणं चत्तारि साहस्सीओ, तेणं आयरक्खा सन्नद्धबद्धवम्भियकवया उत्पीलियसरासणपट्टिया पिणद्धगेविजा बद्धआविद्धविमलवर चिंधपट्टा गहियाउहपहरणा तिणयाणि तिसंधियाई वयरामयाई कोडीणि धणूई पगिज्झ पडियाइयकंडकलावा णीलपाणिणो पीतपाणिणो रत्तपाणिणो चावपाणिणो चारुपाणिणो चम्मपाणिणो दंडपाणिणो खगपाणिणो पासपाणिणो नीलपीयरत्तचावचारुचश्मदंडखग्गपासधरा आयरक्खा रक्खोवगया गुत्ता गुत्तपालिया जुत्ता जुत्तपालिया पत्तेयं २ समयओ विणयओ किंकरभूया चिटुंति४५ो सूरियाभस्स णं भंते! देवस्स केवइयं कालं ठिती पं०?, गोयमा! चत्तारि पलिओवभाई ठिती पं०, सूरियाभस्सणं भंते! देवस्स सामाणियपरिसोववण्णगाणं देवाणं केवइयं कालं ठिती पं०?, गोयमा! चत्तारि पलिओवमाइं ठिती पं०, महिड्ढीए महजुत्ती(ती)ए महब्बले महायसे महासोक्खे महाणुभागे सूरिया देवे, अहो णं भंते! सूरिया देवे महिड्ढीए जाव महाणुभागे ४६) सूरियाभेणं भंते! देवेणं सा दिव्वा देविड्ढी सा दिव्वा देवजुई से दिव्वे देवाणुभागे किण्णा लद्धे किण्णा पत्ते किण्णा
॥ श्री राजप्रश्रीयोपांगम् ॥
पू. सागरजी म. संशोधित
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