Book Title: Agam 13 Upang 02 Rajprashniya Sutra Shwetambar
Author(s): Purnachandrasagar
Publisher: Jainanand Pustakalay
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व०-एस णं सामी! मियवणे उजाणे एत्थ णं आसाणं समं किलामं सम्म पवीणेमो, तए णं से पएसी राया चित्तं सारहिं एवं व०एवं होउ चित्ता!, तए णं से चित्ते सारही जेणेव भियवणे उजाणे जेणेव केसिस्स कुमारसमणस्स अदूरसामंते तेणेव उवागच्छद त्ता तुरए णिगिण्हेइ त्ता रहं ठवेइ त्ता रहाओ पच्चोरूहइत्ता तुरए मोएति त्ता पएसिं रायं एवं०-एह णं सामी! आसाणं समं किलाम पवीणेमो, तए णं से पएसी राया रहाओ पच्चोरुहइ चित्तेण सारहिणा सद्धिं आसाणं समं किलाम सम्म पवीणेमाणे पासइ तत्थ केसीकुमारसमणं, महइमहालियाए महच्चपरिसाइ मझगयं महया २ सद्देणं धम्ममाइक्खमाणं पासइ त्ता इमेयारूवे अज्झथिए जाव समुप्पज्जित्था जड्डा खलु भो! जडं प्रज्जुवासंति मुंडा खलु भो! मुंडं पज्जुवासंति मूढा खलु भो! मूढं प्रज्जुवासंति अपंडिया खलु भो! अपंडियं पज्जुवासंति निविण्णाणा खलु भो! निविण्णाणं पज्जुवासंति से केस णं एस पुरिसे जड्डे मुंडे मूढे अपंडिए निविण्णाणे सिरीए हिरीए ववगए उत्तप्पसरीरे, एस णं पुरिसे किमाहारमाहारेइ किं परिणामेइ किं खाइ किं पियइ किं दलइ किं प्यच्छइ जण्णं एमहालियाए मणुस्सपरिसाए मझगए महया २ सद्देणं बुयाए?, एवं संपेहेइ त्ता चित्तं सारहिं एवं व०-चित्ता! जड्डा खलु भो! जड्ड पजुवासंति जाव बुयाइ, साएऽवि यणं उजाणभूमीए नो संचाएमि सम्म पकाम पवियरित्तए?, तए णं से चित्ते सारही पएसीरायं एवं व०-एस णं सामी! पासावच्चिज्जे केसीना कुमारसमणे जाइसंपण्णे जाव चउनाणोवगए आहोहिए
अण्णजीवी, तए णं से पएसी राया चित्तं सारहिं एवं व०-आहोहियं णं वदासि चित्ता! अण्णजीवियत्तं णं वदासि चित्ता! हंता IM श्री राजप्रश्रीयोपांगम् ॥
पू. सागरजी म. संशोधित
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