Book Title: Acharya Bhikshu Tattva Sahitya 01
Author(s): Tulsi Ganadhipati, Mahapragya Acharya, Mahashraman Acharya, Sukhlal Muni, Kirtikumar Muni, Shreechan
Publisher: Jain Vishva Bharati
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३२८
भिक्षु वाङ्मय खण्ड-१ २६. नाग नागणी हुंता बळता लकड़ा में,
___त्यांने पारसनाथजी काढ्या कहें , बार। अगन में बळता ने राख्या जीवता,
पांणी में अगनादिक रा जीवां में मार।
ओ तो उपगार संसार तणों छ ।
२७. पारसनाथजी घर छोड़े काउसग कीधो जब,
कमठ उपसर्ग कर वरषायों पांणी। जब पदमावती हेठे कीयों सिंघासण,
धरणिंद्र छत्र कीयों सिर आंणी। ओ तो उपगार संसार तणों छे॥
२८. नाग नागणी ने नोकार सुणाए, च्यारूं सरणा में सूंस दराया जांणी। ते सुभ परिणामां सूं मर में हुआ, धरणिंद्र में पदमावती रांणी।
ओ तो उपगार निश्चेइ मुगत रो।
२९. सुग्रीव सूं उपगार कीयों राम लछमण,
जब सुग्रीव हुवों त्यांरो सखाइ। सीता री खबर आणे रावण ने मरायो,
तिण पाछों उपगार कीयों भीड़ आइ।
ओ तो उपगार संसार तणों छे॥
३०. कोइ दुष्टी जीव जूं ने मारतो थो, तिणनें वरजे नें जूं नें वचाइ। ते जूं रो जीव मनख हुवों जब, इण रों कजीयों इण पिण दीयों मिटाइ।
ओ तो उपगार संसार तणों छे॥
३१. धणी रा मूंढा आगें सेवग मरे नें,
धणी ने जीवतों कुसले खेमें काटें। जब धणी तूठों थको रिजक रोटी दें,
इण रो इहलोक रो काम सिराड़े चाढ़ें।
ओ तो उपगार संसार तणों छे।।

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