Book Title: Aagam Sambandhi Saahitya 02 Pratyek Buddhbhashitani Rushibhashitsutrani Moolam
Author(s): Anandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Param Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
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आगम
संबंधी
साहित्य
प्रत
सूत्रांक
[3]
गाथा
॥१-६॥
दीप
अनुक्रम
[१९२१९८]
[भाग-2] प्रत्येकबुद्धभाषितानि ऋषिभाषितसूत्राणि
अध्ययन-[१९], .......मूलं [१] / गाथा [१-६]
पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधितः मुनि दीपरत्नसागरेण पुनः संकलितः (पूर्वकाले आगमरूपेण दर्शितः) “ऋषिभाषित-सूत्राणि”-मूलं
[१९] 'आयरियायण' अध्ययनं
ऋषिभाषितेषु
सिद्धि । सन्चमिणं पुराऽऽरियमासि आयरियायणेणं अरहता इसिणा बुझतं वज्जेनऽणारियं भावं कम्मं वेव अणारियं। आणारियाणि य मित्ताणि आरियत्तमुहिए ॥ १ ॥ जे जणाऽणारिए पिच्वं कम्मं कुव्र्वतऽणारिया । आणारिएहि य मित्तेहि सीदति भवसागरे ॥ २ ॥ संधिज्जा आरियं मगं कम्मं जं बाबि आरियं। आरियाणि य मित्ताणि आरियन्तमुवट्टिए ॥ ३ ॥ जे जणा mr free, mai कुवंति आरियं। आरिएहि य मित्तेहि मुच्वंति भवसागरा ॥ ४ ॥ आरियं णाणं साहू, आरियं साहु दंसण । आरियं चरणं साहू, तम्हा सेवय आरियं ॥ ५ ॥ ॥ एवं से सिद्धे बुद्ध विरए विपावे अलंतातिणो ॥ १६ ॥ आयरियायणायणं १६ ॥ ॐ
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पण १८
आरियज्क
यण १६
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