Book Title: Aagam Manjusha 05 Angsuttam Mool 05 Bhagavati
Author(s): Anandsagarsuri, Sagaranandsuri
Publisher: Deepratnasagar
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सेवं भंते ! सेवं भंते:त्ति जाव विहरति ।५३७॥ श०१४ उ०९॥ केवली णं भंते ! छउमत्थं जाणइ पासइ ?, हंता जाणइ पासइ, जहाणं भंते ! केवली छउमत्थं जाणइ पासह सहा णं सिद्धेऽवि छउमत्थं जाणइ पासइ ?, हंता जाणइ पासइ, केवली गं भंते ! आहोहियं जाणइ पासइ ?.एवं चेव, एवं परमाहोहियं, एवं केवलिं एवं सिदं जाव जहा णं भंते ! केवली सिद्ध जाणइ पासइ तहा णं सिद्धेऽवि सिद्ध जाणइ पासइ ?, हंता जाणइ पासइ, केवली णं भंते! भासेज वा वागरेज वा ?, हंता भासेज वा वागरेज वा, जहा णं भंते ! केवली भासेज वा वागरेज वा तहा ण सिद्धेऽवि भासेज वा वागरेज या ?, णो तिणट्टे समढे, से केणट्टेणं भंते ! एवं बुचइ जहा णं केवली भासेज वा वागरेज वा णो वहाणं सिद्धे भासेज वा वागरेज वा?, गोयमा ! केवलीणं सउट्टाणे सकम्मे सबले सवीरिए सपुरिसक्कारपरक्कमे सिद्धे णं अणुठाणे जाव अपुरिसकारपरकमे, से तेणठेणं जाव वागरेज वा, केवली णं भंते ! उम्मिसेज निमिसेज वा?, हंता उम्मिसेज वा निमिसेज वा एवं चेव, एवं आउद्देज वा पसारेज वा, एवं ठाणं वा सेज वा निसीहियं वा चेएजा, केवली णं भंते ! इमं रयणप्पभं पुढविं रयणप्पभापुढवीति जाणति पासति', हंता जाणइ पासइ, जहाण भंते ! केवली इमं रयणप्पमं पुढविं रयणप्पभापुढवीति जाणइ पासइ तहा णं सिद्धेऽवि इमं रयणप्पभं पुढवि रयणप्पभापुढवीति जाणइ पासइ ?. हंता जाणइ पासइ, केवली णं भंते ! सक्करपभापुढवि सकरपभापुढवीति जाणइ पासइ ?, एवं चेव, एवं जाव अहेसत्तमा, केवली णं भंते ! सोहम्म कप्पं सोहम्मकप्पेति जाणह पासड?.एवं चेव. एवं ईसाणं, एवं जाय अब
मत ! सोहम्म कप्प सहिम्मकप्पति जाणइ पासह, एवं चेव, एवं इंसाणं, एवं जाव अचुयं, केवली णं भंते ! गेवेजविमाणं गेविजबिमाणेत्ति जाणइ पासह?, एवं चेव, एवं 3 णेऽवि, केवली णं भंते! ईसिपम्भारं पढवि इसीपम्भारपुढवीति जाणइ पासइ, एवं चेब, केवली णं भंते! परमाणपोग्गलं परमाणपोग्गलेत्ति जाणइ पासइ, एवं चेव, एवं दपएसियं खंध एवं जाय जहा णं भंते! केवली अणंतपएसिय संधं अणंतपएसिए खंधेत्ति जाणइ पासइ तहा णं सिद्धेऽवि अर्णतपएसियं जाव पासइ ?, हंता जाणइ पासइ । सेवं भंते ! सेचं भंते ! ॥५३८॥ उ०१० इति चतुर्दशं शतकं ॥॥ ॥ नमो सुयदेवीए भगवईए, तेणं कालेणं० सावत्थी नामं नगरी होत्था वन्नओ, तीसे णं सावत्थीए नगरीए बहिया उत्तरपुरच्छिमे दिसीमाए एत्य णं कोट्टए नाम चेइए होत्था बन्नओ, तत्थ णं सावस्थीए नगरीए हालाहला नामं कुंभकारी आजीविओवासिया परिवसति अड्ढा जाब अपरिभूया आजीवियसमयसि लट्ठा गहियट्ठा पुच्छियट्ठा विणिच्छियट्ठा अडिमिंजपेम्माणुरागरत्ता अयमाउसो! आजीवियसमये अट्टे अयं परमट्टे लेसे अणदृत्ति आजीवियसमएणं अप्पाणं भावमाणी विहरइ, तेणं कालेणं० गोसाले मंखलिपुत्ते चउब्बीसवासपरियाए हालाहलाए कुंभकारीए कुंभकारावर्णसि आजीवियसंघसंपरिखुडे आजीवियसमएणं अप्पाणं भावेमाणे विहरइ, तए णं तस्स गोसालस्स मंखलिपुत्तस्स अन्नदा कदायि इमे छ दिसाचरा अंतियं पाउभवित्या तं०-साणे कलंदे कणियारे अच्छिद्दे (प्र० च्छेदे) अग्गिवेसायणे अजुन्ने गोमायुपुत्ते, तए णं ते छ दिसाचरा अट्टविहं पुव्वगर्य मग्गदसमं सतेहिं २ मतिदसणेहिं निजुहंति त्ता गोसालं मंखलिपसं उचट्ठाईस, तए णं से गोसाले मंखलिपुत्ते तेणं अटुंगस्स महानिमित्तस्स केणइ उाडोयमेत्तेणं सव्वेसिं पाणाणं भूयाणं जीवाणं सत्ताणं इमाई छ अणइकमाणजाई वागरणाई वागरेति २०-लाभ अलाभ सुहं दुक्खं जीवियं मरणं तहा। तए णं से गोसाले मंखलिपुत्ते तेणं अटुंगस्स महानिमित्तस्स केणइ उल्लोयमेत्तेणं सावत्थीए नगरीए अजिणे जिणप्पलावी अणरहा अरहप्पलावी अकेवली केवलिप्पलावी असवन्नू सव्वन्नुप्पलावी अजिणे जिणसह पगासेमाणे विहरइ । ५३९। तए णं सावत्थीए नगरीए सिंघाडगजावपहेसु बहुजणो अन्नमन्नस्स एवमाइक्खइ जाव एवं परुवेति-एवं खलु देवाणुप्पिया ! गोसाले मंखलिपुत्ते अजिणे जिणप्पलावी जाव पकासेमाणे विहरति, से कहमेयं मन्ने एवं?, तेणं कालेणं० सामी समोसढे जाव परिसा पडिगया, वेणं कालेणं० समणस्स भगवओ महावीरस्स जेट्टे अंतेवासी इंदभूती णामं अणगारे गोयमगोत्तेणं जाव छटुंछट्टेणं एवं जहा बितियसए नियंतृदेसए जाब
अडमाणे बहुजणसह निसामेति, बहुजणो अन्नमन्नस्स एवमाइक्खइ०-एवं खलु देवाणुप्पिया ! गोसाले मंखलिपुत्ते अजिणे जिणप्पलावी जाव पगासेमाणे विहरति, से कहमेयं मन्ने एवं ?, तए णं भगवं गोयमे बहुजणस्स अंतियं | एयम? सोचा निसम्म जाव जायसड्ढे जाव भत्तपाणं पडिदंसेति जाव पजवासमाणे एवं व० एवं खल। लिपुत्तस्स उहाणपरियाणियं परिकहियं, गोयमादी समणे भगवं महावीरे भगवं गोयम एवं वयासी-जण्णं से बहुजणे अन्नमन्नस्स एवमाइक्खइ०-एवं खलु गोसाले मंखलिपुत्ते अजिणे जिणप्पलावी जाव पगासेमाणे विहरह तण्णं मिच्छा, अहं पुण गोयमा! एवमाइक्खामि जाव परूबेमि-एवं खलु एयस्स गोसालस्स मंसलिपुत्तस्स मंसली नाम मंखे पिता होत्था, तस्स णं मखलिस्स मंखस्स भद्दा नाम भारिया होत्या सुकुमाल जाव पडिरूवा, तएणं सा भद्दा भारिया अन्नदा कदाई गुश्विणी यावि होत्या, तेणं कालेणं० सरवणे नामं सनिवेसे होत्था रिद्धस्थिमिय० जाव सन्निभप्पगासे पासादीए०, तत्थ णं सरवणे सन्निवेसे गोचहुले नाममाहणे परिवसति अड्ढे जाव अपरिभूए रिउब्वेद जाव सुपरिनिहिए याबि होत्या, तस्स णं गोबहुलस्स माहणस्स गोसाला यावि होत्या, तए णं से मंखली मंखे नामं अचया कयाई भदाए भारियाए गुविणीए सद्धि चित्तफलगहल्यगए मंखत्तणेणं अप्पाणं भावमाणे पुच्वाणुपुचि चरमाणे गामाणुगामं दूइजमाणे जेणेव सरवणे सनिवेसे जेणेव गोचहुलस्स माहणस्स गोसाला तेणेव उवागए त्ता गोबहुलस्स माणस्स गोसालाए एगदेसंसि मंडनिक्खेवं करेति त्ता सरवणे सन्निवेसे उच्चनीयमज्झिमाई कुलाई घरसमुदाणस्स भिक्खायरियाए अडमाणे वसहीए सबओ समंता मग्गणगवेसणं करेति वसहीए सब्बओ समंता मग्गणगवेसणं करेमाणे अन्नत्व वसहिं अलभमाणे तस्सेव गोबहुलस्स माइणस्स गोसालाए एगदेसंसि वासावासं उवागए, तए णं सा भहा भारिया नवण्हं मासाणं बहुपडिपुन्नाणं अट्ठमाण राइंदियाणं वीतिकंताणं सुकुमाल जाव पडिरूवगं दारगं पयाया, तए णं तस्स दारगस्स अम्मापियरो एक्कारसमे दिवसे वीतिकंते जाव वारसाहे दिवसे अयमेयारूवं गुण्णं गुणनिष्फन्नं नामजं करेंति-जम्हा णं अम्हं इमे दारए गोबहुलस्स माहणस्स गोसालाए जाए तं होउ णं अम्हं इमस्स दारगस्स नामधेज गोसाले गोसालेत्ति, तए णं तस्स दारगस्स अम्मापियरो नामधेज करेंति गोसालेति, तए णं से गोसाले दारए उम्मुक्कबालभावे विण्णायपरिणयमेत्ते जोवणगमणुप्पत्ते सयमेव पाडिएकं चित्तफलगं करेति त्ता चित्तफलगहत्वगए मखत्तणेणं अप्पाणं भावमाणे विहरति । ५४० । तेणं कालेणं ० अहं गोयमा ! ३०६ श्रीभगवत्यंग-सा-१५
मुनि दीपरत्नसागर

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