Book Title: Vasant Vilas Fagu
Author(s): Madhusudan Chimanlal Modi
Publisher: Rajasthan Prachyavidya Pratishthan Jodhpur

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Page 77
________________ The Index of OG. Stanzas 103 57 101 97 16 ON 59 [लघुवाचना] [ The serial No. of Stanza is given ] अमिय कलश कुच तापणि 59 | पाडल छइ अतिकूवली आंबुलइ मांजरि लागा 23 वहिनूए रहइ न मनमथ इक थुडि करुणी न वेउल 116 बांधा कामु ति फरकसु इणि परि नाहु ति रीझषी 118 वाहुलता अतिकोमल इम देखिउ वन संपद। बोलइ ते ललपलती य उर वरि हारू ति भारू 76 | बोलावद तउ महुयर कामिणि पामइ जे सुख 94 मयणु जि वयण निरोपई केसुय कलिय ति वांकुडी मुरुकुलइ मुखु मचकोडइ कोइल आंबुलाडालिहि 18| रहि रहि तोरिय जो अलि घूमइ मधुप सकेसर 25 | रासु रमई मन सरसिय चांपुला तश्वर नी कली रितुपति राउ प्रधानु छाजइ नेह परायणु 110 वनि विरचिय कदलीहर जिम जिम विहसइ षणसा 12 | पनि पिलसइ सवि कामुक ने किमइ गजगति चालइ 72 | वर्मत तणा गुण गहगया बलका विमल कपोल कि 46 'पालइ बिलसिवा विधरु न तिलकुसुमोपमु नाकु रे । विउलसिरी मदभिभल दमुणइं गुणमहिमां तड विरह हियइ तिह भागलउ देसु कपूरिहिं वासि रे धीर सुभट कुसुमायुघ धनु धनु वायस तुव सरु वेणि भणउं कि भुजंगम नमणि न करहि पयोधर 62 | सकल कला तूं मिशाकर नाभि गंभीर सरोवर सकुन विचारु संसाविय . नाहु म छोछि रि गामटि | सखि अलि चरणि न चांपा निषिधिपणइ विधाता घडी सखि मुझु फुरकइ जाघडी . पथिक भयंकर केतु कि . 35| सहनि सलील मदालस पहिलउ सरसति अरचिसु 2 हरिण हरावइ जोतीय .. पहुतिय समरवि सिवरति ___4 | हल सखि दुःखु दुनीठउ , 6 .50 86 43 108 84 53

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