Book Title: Shastra Sandesh Mala Part 10
Author(s): Vinayrakshitvijay
Publisher: Shastra Sandesh Mala
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________________ // 48 // // 49 // // 50 // // 52 // // 53 // एगो अन्ने चक्खू मेत्तेणं पेहयंति थंडिल्ले / हरियतणाइविसुद्धे तत्तो अत्थंगए सूरे पडिकमणमंडलीए अयंति अहक्कमेण सव्वे वि / पडिकमणं देवसियं पक्खंते पक्खियं तहय चीवंदण आयरियाइवंदणं सव्ववयणमुच्चरणं / सामाइयस्स भणणं अइयारत्थं च उस्सग्गो चउवीसत्थयकड्डण मुहपोत्ती वंदणं च आलोए / आलोइय उववेसिय सुत्तब्मणणं च विनेयं वंदणयं खामणयं वंदणयं चेव तहय दायव्वं / आयरियाई गाहा सामाइय तिनि उस्सग्गा सुयखेत्तदेवयाए उस्सग्गा दुन्नि हुंति नायव्वा / मोहपोत्ती वंदणयं इच्छामो वयणमुच्चरणं तिनिथुई सक्कथओ छोभं तह वंदणं च दायव्वं / थोत्तं चिय विनेयं तिनेव य छोभवंदणया . मुहपोत्ती वंदणयं संबुद्धाखामणं तहाऽऽलोए / वंदण पत्तेयं खामणाणि वंदणय सुत्तं च सुत्तं अभुट्ठाणं उस्सग्गो पुत्ति वंदणं तहय / पज्जते खामणया तह चउरों छोभवंदणया तत्तो सोहिनिमित्तं दिवसच्चरियस्स पायच्छित्तस्स / उस्सग्गं पकरिय. देवसुगुरुगुणवत्रणं काउं सज्झायं पुव्वं पिव संदिस्सावित्तु जह समाहीए / . किच्चा सज्झायं तो वंदिय पोत्ति पमज्जेइ वंदिय राईसंथारयम्मि ठायह नमित्तु राइएँ / संथारयम्मि ठातह तत्तो सक्कत्थयं भणइ 315 // 54 // // 55 // // 56 // // 57 // // 58. // // 59 //
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