Book Title: Sanmati Tark Prakaran Part 03
Author(s): Abhaydevsuri
Publisher: Divya Darshan Trust

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Page 419
________________ ४०० सन्मतितर्कप्रकरण ४ - सन्मतिमूळगाथागताः सन्याः । शब्द व्या . पू. काण्ड गाथा प्या. पृ. काम गाथा ३ " १ २ १५ १५ १ पत्यार पावणा 'पयडी पयुत्तो ४२ पजुगासन पंचणाणी - ४९ १.,७२६ पर २ ३९६१ २ १८,२१, १६,६२), ३ ५,२२,२३,४७,६३५,६०, (५५ २ . पत्रिकुट्ठा पडिकुट्ठो परिजोअर्ण 'परिणीओ 'परिपुण्ण परिपुणं पडिपुण्णजोमणगुणो पडिपुण्णा पडिबदा परिवे 'पडिवत्ति YYS १.२४ م परणिमितं परतित्यियवतन परपओ परपजवेदि परमत्य परमत्यो परमाणु परम्मि परबत्तन्यपक्वाअविसिट्ठा पररियालणे परसमय परसमया परिकम्मणा परिसम्मणाणि १ २६ ع م س ३६,४६ ४६,७३२ ६४४ °पडिबत्ती पडिवत्तीनिगमे पडिसिद्ध पडिसेहे س २ ३९ م م मितं ३,५०, ४५३,४५६, ५९१६२३, ७२० २८,६३९, ३ १ पडुबवयर्ण पणिहाणं पण्णत्तं °वण्णाओ २१ २६ ४४९ م سم سم م م م لم ع س ३ ४,२२ ६३.६३७ पण्णवण ७२७ पण्णवणपज्जा ७२७ परिगमणं परिग परिच्चय परियाण परिणयं परिणाम परिणाम परिणामको परिणामो परितं परिपबिया परिभुजा परिसुदं परिसुदो परूजणा ४२२,४२३ पण्णवणा م س २६,५३, 0 ३ १३,२१ २१४ २ २. २१. س 0 पण्णवणाणिच्चिओ पण्णवणाविसउ पण्णवणिजा ४५५ م م ४५३ ६१५ ३ ४५,४८ ه م ३१५,२७९ ६४५ ५६,५८ م م पण्णवणे पण्णनयंतो पण्णवेज पत्तेय पत्तेयं पत्थणा ५४ ११६ पसारियस्स 'पसाहणं पसाहा १ २०४ ०पहे ३ १५९ Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org

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