Book Title: Nandanvan Kalpataru 2017 06 SrNo 38 Author(s): Kirtitrai Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti View full book textPage 5
________________ वाचकानां प्रतिभावः सम्पूज्याः आचार्यचरणाः मान्या कीर्तित्रयी, सादरं प्रणतयः । यत्र नन्दनवनं तत्र संस्कारिता संस्कृतस्य सेवया संस्कृता परम्परा । संस्कारमूलतस्तत्र भव्य-भद्रता भारतीयता वरा भ्राजते हितानुगा । इति विनिवेदयामि ॥ डॉ. वासुदेवः वि. पाठकः अहमदाबादतःPage Navigation
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