Book Title: Maharani Chelna Ki Vijay
Author(s): Rajni Jain
Publisher: Acharya Dharmshrut Granthmala

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Page 15
________________ चलना अगले दिन राजा चेटक के पास तीनों जौहरी पहुंचे वाह ! कितने सुंदर रत्न हैं ! राजा चेटक, जौहरी रत्न प्रकाश की बातों से बहुत प्रसन्न हुए. रात को अपने उस निवास पर जहाँ ये लोग ठहरे थे. वाह युवराज ! आज तो आपका अभिनय सर्वश्रेष्ठ था. कोई नहीं कह सकता था कि आप जौहरी नहीं युवराज हैं. 13 महाराज! ये रत्न आप जैसे पारखी के सामने कुछ नहीं हैं: महामंत्री जी ! हमने जितने रत्न चुने हैं उनका मूल्य जौहरी को दे दीजिए और रत्न ले कर कोषागार में रखवा दीजिए. मैं युवराज कहाँ हूँ माणिकचंद . मैं तो रत्न प्रकाश जौहरी हूँ. इतनी जल्दी पाठ भूल गए. और हाँ आहिस्ता बोल दीवारों के भी कान होते हैं.

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