Book Title: Kesariyaji Rushabhdev Tirth Ka Itihas
Author(s): Motilal Marttand
Publisher: Mahavirprasad Chandanlal Bhanvra Jain

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Page 36
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir -३४ उत्सव ने भयंकर हत्याकांड का रुप धारण किया ध्वजादंड चढाने के साथ-साथ इस बात का प्रयत्न भी किया कि दक्षिण दिशा वाले बडे मण्डप की मूल प्रतिमानों पर मूकूट-कुण्डल भी चढा दिये जाय । यह देखकर दिगम्बर जैन समाज ने तोव्र विरोध किया, किन्तु नक्कारखाने में तुती को आवाज कोई नहीं सुनता को कहावत के अनुसार कोई सुनवाई नहीं हुई। मन्दिर के हाकिम श्रीलक्ष्मणसिंहजो के आदेश से दिगम्बरों का मन्दिर से पृथक किया जाने लगा और सिपाहियों ने संकेत पाकर मारकाट शुरु को और भागने वाले मन्दिर के द्वार पर राक दिये गये द्वार बन्द कर दिया गया। सिपाहियों ने हाथों में लाठिया आदि लेकर दिगम्बरों को मारना शुरु किया। परिणाम स्वरुप सर्वथा निरपराध ५ दिगम्बर भाई मारे गये। जिनके नाम इस प्रकार थेपं० गिरधरलाल, परसाद के दीपचन्दजो नागदा, पूनमचन्दजो, सेमारो के माणकचन्दजो, ४४ घायल हुए और बहुतो को चोट आई। इस प्रकार जैन मन्दिर में हत्याए होने से हत्याकाण्ड हो गया। अनिष्ट समय में चढाया गया ध्वजादण्ड थोडे ही समय के बाद गिर पड़ा जो अब तक नहीं चढ पाया है। केवल ध्वजा का स्तम्भ ही लगा है । उसी ध्वजादण्ड के For Private and Personal Use Only

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