Book Title: Kailas Shrutasagar Granthsuchi Vol 2
Author(s): Mahavir Jain Aradhana Kendra Koba
Publisher: Mahavir Jain Aradhana Kendra Koba

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Page 471
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatith.org Acharya Shri Kailassagarsur Gyanmandir ४०२७) संस्कृत, प्राकृत व अपभ्रंश भाषाओं की मूल कृति के अकारादि क्रम से प्रत-पेटाकृति क्रमांक सूची परिशिष्ट-१ ४५१ चन्दनषष्टिव्रत कथा, आ. छत्रसेन, सं., श्लोक ७७, पद्य, दि., (अरिहननरजोह) २६३०-१ (जिनं प्रणम) ६००२-४४(+) (२) चारित्रसार-टिप्पणक, सं., गद्य, दि., (नमोनन्तसुख) २६३०-२ चन्द्रगुप्त सोलहस्वप्न विचार, प्रा., गद्य, मूपू., (तेणं कालेण) चार्चिक, सं., गद्य, मूपू., (अवरुप्यरस) ६२८५ १९९१-१(+) चित्रसेनपद्मावती चरित्र, आ. महीतिलकसूरि, सं., श्लोक १२३२, चन्द्रदूत काव्य, कवि जम्बू, सं., श्लोक २३, पद्य, मूपू., _ वि. १५२४, पद्य, मूपू., (नत्वा जिनप) ३३९(+), ८०४९-२), (यदतिसितशर) ८०५२ ४२५७+5), ८३९, ३४१७, ३७६८, ३९५४, ५५४०, ७६७८, (२) चन्द्रदूत काव्य-वृत्ति, सं., गद्य, मूपू.. (जम्बू नाग) ८०५२ ७८९७, ८१७८, ८५२०, १९८६), ७४७७(), ७६०४(5) चन्द्रधवल कथा-अतिथिसंविभागवते, आ. माणिक्यसून्दरसूरि, सं., । (२) चित्रसेनपद्मावती चरित्र-टबार्थ', मागु., गद्य, मूपू., (अशरण ग्रं.४००, गद्य, मूपू., (इह भरतक्षे) ४२५५(4) शरण) ८०४९-२(१), १९८६(७), ७४७७(5) चन्द्रप्रज्ञप्ति, प्रा., २० प्राभृत, ग्रं.१८५४, पद्य, मूपू., (नमो अरि०) | (२) चित्रसेनपद्मावती चरित्र-टबार्थ, गणि भक्तिविजय, मागु., ६३), ७०(+), ५४५७), ६२२३+5), ४०२७६) गद्य, मूपू., (अद्य क० पह) ८३९, ३४१७, ३७६८, ३९५४, (२) चन्द्रप्रज्ञप्ति-टीका, आ. मलयगिरिसूरि , सं., ग्रं.९४००, गद्य, ७६७८ मूपू., (मुक्ताफलमि) ९२४८(+) चैत्यप्रतिष्ठा विधि, सं., श्लोक २८+४०, पद्य, मूपू., (विषमैरगु) (२) चन्द्रप्रज्ञप्ति-टबार्थ", मागु., गद्य, जै., (-) ६२२३(+5), ८५५० (२) चैत्यप्रतिष्ठा विधि-टबार्थ, मागु., गद्य, मूपू., (विषम क० एक) चन्द्रप्रभजिन स्तोत्र, सं., श्लोक ५, पद्य, मूपू., (ॐ चन्द्रप) ८५५० ६२७९-२६), ६०७७-२, ६०९६-१०६६) चैत्यवन्दनभाष्य, आ. देवेन्द्रसूरि, प्रा., गा. ६३, पद्य, मूपू., चमत्कारचिन्तामणि, राजऋषिभट्ट, सं., पद्य, (क्वणत्किङ) (वन्दित्तु) ४२३४(+), ४११३(+). ३१६८+#), ४२४२, ८७७४, ७३५६ ६४०४-१ (२) चमत्कारचिन्तामणि-टबार्थ, मागु., गद्य, मूपू., (श्रीवामेय) (२) चैत्यवन्दनभाष्य-बालावबोध, मागु., गद्य, मूपू., (वं कहतां) ७३५६ ३१६८) चम्पकमाला कथा, प्रा., गा.३४४, पद्य, जै., (सम्मत्ते) २८८०-१ (२) चैत्यवन्दनभाष्य-टबार्थ', मागु., गद्य, मुपू., (-) ४११३(१) चरणसत्तरीकरणसत्तरी गाथा, प्रा., गा. २, पद्य, मूपू., (एवय | (२) चैत्यवन्दनभाष्य-टबार्थ', मागु., गद्य, मूपू., (वन्दित्तुं) ४२४२ समणधम) १८२०-२+#) (२) चैत्यवन्दनभाष्य-टबार्थ, मागु., गद्य, मूपू., (वान्दि करक) चाखनाम, सं., श्लोक २, पद्य, (अशोकश्च वि) ६३४१-२(+) ८७७४ चातुर्मासिकत्रय व्याख्यान, सं.,मागु., गद्य, मूपू., (सामाइकावश) चैत्रीपूर्णिमा विधि, सं.,प्रा.,मागु., गद्य, मूपू., (प्रथम जागा) ६०६२ ५९८०१, ५९८१, ६२७६, ६५८९, १८८७, १८५७ ७१६६६६), ८७३९(5) चैत्रीपूर्णिमा व्याख्यान, मु. जीवराज, सं., वि. १८६९, गद्य, मूपू., (२) चातुर्मासिकत्रय व्याख्यान-बालावबोध, मागु., गद्य, मूपू., (तीर्थराज) ६०८४-४), ६०८५-४(+5), ५७४१, ५८३०-२ (आसाढ चौमास) १८८७) चोर-साहुकारपरीक्षा, सं.,मागु., गद्य, जै., (ॐ नमो इन) ७८२१-४ चातुर्मासिकत्रय व्याख्यान, पाठक क्षमाकल्याण, सं., ग्रं.४०१, गद्य, चौमासी देववन्दन, मागु.,प्रा., प+ग, मूपू., (-) ५४१९ मूपू., (स्मारं स्म) २७६८०, ४७९४), ५५६०५), ६०८४-१(+), छन्दोनुशासन, आ. हेमचन्द्रसूरि कलिकालसर्वज्ञ, सं., अध्याय ८, ५५८३-१(45), ३४२४, ४४८२, ६१२२, ८७८५ गद्य, मूपू., (वाचं ध्यात) ५६८५९+#5), ४७२५, १९३९ चातुर्मासिक व्याख्यान, सं.,राज., पद्य, मूपू., (सामायिकावश) (२) छन्दोनुशासन-स्वोपज्ञ छन्दचूडामणि वृत्ति, आ. हेमचन्द्रसूरि ३५८३, ३११८-१ कलिकालसर्वज्ञ, सं., गद्य, मूपू., (शब्दानुशास) ५६८५९+05), चातुर्मासिक व्याख्यान, उपा. समयसुन्दर गणि, सं., वि. १६६५, ४७२५, १९३९ गद्य, मूपू., (प्रणम्य पर) ५८७४, ३१९५, १८८६(३) जन्मपत्री पद्धति, मु. मानसागर, सं., गद्य, मूपू., (नीचोनितास) चातुर्मासिक व्याख्यान, ऋ. सुरचन्द्र, सं.,प्रा.,मागु., गद्य, मूपू., ८७९९, ३१५९७), ७६७९-१(5), ७७१२(5),७८७१(६), २३८०(5) (प्रणम्य) २२००(+) जम्बूअध्ययन प्रकीर्णक, गणि पद्मसुन्दर, प्रा., २१उद्देश, गद्य, चारित्रसार, चामुण्डराय, सं., ग्रं.१७००, प+ग, दि., मूपू., (तेणं कालेण) ७२१(+), १९५६(५), २६४३(+), ३५४७+), १२(5) For Private And Personal Use Only

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