Book Title: Jinabhashita 2007 12 Author(s): Ratanchand Jain Publisher: Sarvoday Jain Vidyapith Agra View full book textPage 3
________________ रजि. नं. UPHIN/2006/16750 दिसम्बर 2007 सम्पादक प्रो. रतनचन्द्र जैन कार्यालय ए/2, मानसरोवर, शाहपुरा भोपाल- 462039 (म.प्र.) फोन नं. 0755-2424666 सहयोगी सम्पादक पं. मूलचन्द्र लुहाड़िया, मदनगंज किशनगढ़ पं. रतनलाल बैनाड़ा, आगरा डॉ. शीतलचन्द्र जैन, जयपुर डॉ. श्रेयांस कुमार जैन, बड़ौत प्रो. वृषभ प्रसाद जैन, लखनऊ डॉ. सुरेन्द्र जैन 'भारती', बुरहानपुर शिरोमणि संरक्षक श्री रतनलाल कँवरलाल पाटनी (मे. आर. के. मार्बल) किशनगढ़ (राज.) श्री गणेश कुमार राणा, जयपुर प्रकाशक सर्वोदय जैन विद्यापीठ 1/205, प्रोफेसर्स कॉलोनी, आगरा-282002 (उ.प्र.) फोन : 0562-2851428, 2852278 सदस्यता शुल्क 5,00,000रु. 51,000रु. 5,000रु. शिरोमणि संरक्षक परम संरक्षक संरक्षक आजीवन वार्षिक 1100 रु. 150 रु. एक प्रति 15 रु. सदस्यता शुल्क प्रकाशक को भेजें। Jain Education International मासिक जिनभाषित • लेख आचार्य श्री विद्यासागर जी के दोहे • बारह भावना : मुनि श्री सुव्रतसागर जी ● मुनि श्री क्षमासागर जी की कविताएँ • सम्पादकीय : पंचकल्याणकों के आध्यात्मिक स्वरूप की आवश्यकता • सम्यग्दर्शन : श्री गणेशप्रसाद जी वर्णी • दिव्यध्वनि की दिव्यता : मुनिश्री प्रणम्यसागर जी • महावीर का अहिंसाव्रत : आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी • ख्यातिवाद : प्रमेयकमलमार्त्तण्ड के प्रकाश में : डॉ० वीरसागर जैन • जरा सोचिए गाय के बारे में • कविता अन्तस्तत्त्व • दिन पहाड़ से • जिज्ञासा समाधान ● कथा • भगवान् पार्श्वनाथ : श्रीमती मेनका गाँधी • बिस्किट और दिग्भ्रमित ग्राहक : श्री आदिनाथ युवक संगठन, फलटण • बुन्देलखण्ड का जैन कला-वैभव : श्री राकेश दत्त त्रिवेदी • ग्रन्थ समीक्षा वर्ष 6, समाचार • 'ऐक्यूप्रेसर फुट रिफलेक्सोलॉजी' : मनोज जैन 'मधुर' : पं. रतनलाल बैनाड़ा For Private & Personal Use Only : मुनि श्री समतासागर जी लेखक के विचारों से सम्पादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है। 'जिनभाषित' से सम्बन्धित समस्त विवादों के लिये न्यायक्षेत्र भोपाल ही मान्य होगा । अङ्क 12 पृष्ठ आ. पृ. 2 आ. पृ. 3 आ. पृ. 4 2 461 11 13 16 18 19 223 12 24 26 27 29-32 www.jainelibrary.orgPage Navigation
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