Book Title: Jain Vidya 19
Author(s): Kamalchand Sogani & Others
Publisher: Jain Vidya Samsthan

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Page 15
________________ जैनविद्या - 19 सौ उनचास गाथाएँ हैं । 'लब्धिसार' में जीव के कर्मबन्धन से मुक्त होने का उपाय तथा प्रक्रिया बतलाई गई है। मोक्ष की पात्रता जीव में सम्यक्त्व की प्राप्ति होने पर ही मानी जाती है क्योंकि सम्यग्दृष्टि जीव ही मोक्ष प्राप्त करता है तथा सम्यग्दर्शन होने के पश्चात् सम्यक्चारित्र का भी होना आवश्यक है। अतः सम्यग्दर्शन और सम्यक्चारित्र की लब्धि अर्थात् प्राप्ति का कथन होने से ग्रन्थ का नाम लब्धिसार रखा गया है। क्षयोपशम, विशुद्धि, देशना, प्रायोग्य और करणलब्धि नाम की पाँच लब्धियों में से आरम्भ की चार लब्धियाँ तो सर्वसाधारण के होती रहती हैं किन्तु करणलब्धि के होने पर ही सम्यक्त्व की प्राप्ति होती है। क्षपणासार __ छह सौ तिरेपन गाथाओं वाले 'क्षपणासार' में कर्मों को क्षय करने की विधि का निरूपण किया गया है। यह ग्रन्थ 'गोम्मटसार' का उत्तरार्धरूप है। इस ग्रन्थ की प्रशस्ति से ज्ञात होता है कि माधवचन्द्र त्रैवेद्य ने बाहुली मंत्री की प्रार्थना पर संस्कृत टीका लिखकर पूर्ण की। 'क्षपणासार' पर केवल पण्डित टोडरमल रचित भाषा-टीका ही उपलब्ध है। इसप्रकार सिद्धान्तचक्रवर्ती आचार्य नेमिचन्द्र दार्शनिक अभिज्ञाता थे। आचार्यश्री के. 'गोम्मटसार' तथा 'लब्धिसार' की रचना के पश्चात् षट्खण्डागम और कषायपाहुड के साथ उनकी टीका धवला और जयधवला को भी लोग भूल-से गए हैं। परवर्तीकाल में सिद्धान्त-ग्रन्थों को जो स्थान प्राप्त था धीरे-धीरे वह आचार्य नेमिचन्द्र के 'गोम्मटसार' को मिल गया। 1. गोम्मटसार, कर्मकाण्ड, गाथा 397। 2. गोम्मटसार, कर्मकाण्ड, गाथा 4361 3. गोम्मटसार, कर्मकाण्ड, गाथा 785 । 4. लब्धिसार, गाथा 6481 5. त्रिलोकसार, गाथा 1018 । 6. चन्द्रप्रभचरित, छंदांक 3 एवं प्रशस्ति । 7. गोम्मटसार, कर्मकाण्ड, गाथा 1। 8. गोम्मटसार, जीवकाण्ड, गाथा 1। 9. गोम्मटसार, कर्मकाण्ड, गाथा 45। 10. गोम्मटसार, कर्मकाण्ड, गाथा 258 । 11. 'गोम्मटसारनामधेय पंचसंग्रहं शास्त्रं प्रारम्भ माणः' - मन्दप्रबोधिनीटीका, पृष्ठ 3। 12. गोम्मटसंगह सुत्तं - कर्मकाण्ड, गाथा 965 और 968। 13. गोम्मटसार, जीवकाण्ड, गाथा 139। 14. 'सम्यग्दर्शन-सम्यकचारित्रयोर्लब्धिः प्राप्तिर्यस्मिन् प्रतिपाद्यते स लब्धि साराख्यो ग्रन्थः।' - लब्धिसार टीका। मंगलकलश 394, सर्वोदयनगर, आगरा रोड, अलीगढ़ - 202001 (उ.प्र.)

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