Book Title: Jain Jyoti
Author(s): Jyoti Prasad Jain
Publisher: Gyandip Prakashan

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Page 167
________________ एचिक माने दण्डनायकों को बननी, डाकरस द्वि. को fuarant, तथा प्रसिद्ध content भरत एवं मरियाने तू, की परदादी । इस महिला का अपरनाम येचियक्के या एचियके था । [जैणिसं. iii. ३०८, ४११] १. होयसल विष्णुवर्धन के महामन्त्री गंगराज के भतीजे एचिराज ( द्वि०) दण्डनायक की धर्मात्मा पहनी और शुभचन्द्र सिद्धान्त की गृहस्थ शिष्या । ल० ११३२ ई० केशि ले. में इस महिला की उपमा पुराण प्रसिद्ध सीता और कम्मिणी से दो है, अपने पति एजिराज द्वि का समाधिलेख उसने ही बंकित कराया था । लेख में उसका अपरनाम एचम्बे दिया है । [जैशिसं. १४४] २. २०५१ ६० के लक्ष्मेश्वर के शि. ले. में उल्लिखित दिनकर के पुत्र दूडम की धर्मात्मा पत्नि । [ जैशिस iv. १६५ ] एविगांक-- दे. एच प्र० । [ मेजे. ११६] दे. एचव दण्डनायकिति । एचिमकेएधिराज - एचिसेट्टि - दे. एच प्र. व द्वि । [ मेजं. १२६ ] १. श्रवणबेलगोल की विन्ध्यगिरि पर गोम्मटटेव सूत्रालय मे मोसले के बहु व्यवहारो बस्रविसेट्टि द्वारा प्रतिष्ठापित चतुर्विंशति तीर्थंकरों की अष्टविध पूजार्था के लिए मासिक व वार्षिक दान देने वाला, ११८५ ई० में, एक धर्मात्मा महावन । [जैशिस. i. ८६, ३६१] २. वीर बक्ष्लाल- जिनालय का संभवतया पितामह । (११७९ ई०) के निर्माता देविसेट्टि [जैशिख. iv. २७१] एक्जलदेवी हमच के त्यागि सान्तर की रानी और बोर सारतर को धर्मात्मा जननी 1 [प्रमुख. १७२] एरव्य- नल्लूर का एक श्रावक, जिसकी धर्मारमा पनि जक्कियन्वे ने, जो कस्तूरी भट्टार की श्राविका थी और चन्दिमध्ये बाबुदि की मन्त्राणी थी, ल० १०५० ई० में समाधिमरण किया था । [जैशि. ii. १८३] एनावि कुलनम~- तमिल देशस्थ विरुमलइपर्यंत के प्राचीन तमिल लेख में ऐतिहासिक व्यक्तिकोश १५३

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