Book Title: Apbhramsa Bharti 1990 01
Author(s): Kamalchand Sogani, Gyanchandra Khinduka, Chhotelal Sharma
Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy

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Page 109
________________ 98 अम्हे अम्ह क्रियाएँ 1. 2. - हम दोनों / हम सब हस = हँसना, रूस = रूसना, जीव = जीना म्हे म्ह हे म्ह हे श्रम्हई प्रहे प्रम्हई म्हे श्रम्हई हे प्रह अम्हे म्ह हे प्रह पाठ 5 सय = सोना, लुक्क = छिपना, वर्तमानकाल > हमहूं / हसमो / हसमु / हसम - सयहूं / सय मो / सयमु / सयम > गच्चहूं / गच्चमो / णच्चमु / णच्चम > रूस हूं / रूस मो / रूस मु / रूसम -लुक्कहुं / लुक्कमो / लुक्कमु / लुक्कम - जग्गहुं / जग्गमो / जग्गमु / जग्गम - जीवहूं / जीवमो / जीवमु / जीवम = = = = = अपभ्रंश भारती णच्च = नाचना जग्ग= जागना हम दोनों हँसते हैं / हँसती हैं । हम सब हँसते हैं / हँसती हैं । हम दोनों सोते हैं / सोती हैं । हम सब सोते हैं / सोती हैं । हम दोनों नाचते हैं / नाचती हैं । हम सब नाचते हैं / नाचती हैं । हम दोनों रूसते हैं / रूसती हैं । हम सब रूसते हैं / रूसती हैं । हम दोनों छिपते हैं / छिपती हैं । हम सब छिपते हैं / छिपती हैं । हम दोनों जागते हैं/ जागती हैं । हम सब जागते हैं/ जागती हैं । हम दोनों जीते हैं / जीती हैं । हम सब जीते हैं / जीती हैं । - हम दोनों / हम सब, उत्तम पुरुष बहुवचन ( पुरुषवाचक सर्वनाम ) । वर्तमानकाल के उत्तम पुरुष बहुवचन में 'हुं', मो, मु और 'म' प्रत्यय क्रिया में लगते हैं । 'मो' 'मु' और 'म' प्रत्यय लगने पर प्रकारान्त क्रिया के अन्त्य 'म' का 'श्रा' 'इ' प्रोर 'ए' भी हो जाता है । अतः हसामो, हसामु, हसाम / हसिमो, हसिमु, हसिम / हसेमो, हसेमु, हसिम रूप और बनेंगे । इसी प्रकार अन्य प्रकारान्त क्रियाओं के साथ भी समझ लेना चाहिए । 3. उपर्युक्त सभी क्रियाएँ अकर्मक हैं । 4. उपर्युक्त सभी वाक्य कर्तृवाच्य में हैं । यहाँ कर्ता उत्तम पुरुष बहुवचन में है प्रत: क्रिया भी उत्तम पुरुष बहुवचन की ही लगी है ।

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