Book Title: Agam Sudha Sindhu Part 02
Author(s): Jinendravijay Gani
Publisher: Harshpushpamrut Jain Granthmala
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________________ श्रीमद्व्याख्याप्रज्ञप्ति (श्रीमद्भगवती) सूत्र :: शतर्फ 11 : उ० 12 ] [4.1 जेणेव इसिभइपुत्ते समणोवासए तेणेव उवागज्छन्ति 2 इसिभद्दपुत्तं समणोवासगं वंदंति नमसंति 2 एयमढे संमं विणएणं भुजो 2 खामेंति 6 / तए णं समणोवासया पसिणाई पुच्छंति 2 अट्ठाई परियादेयंति 2 समणं भगवं महावीरं वंदति नमसंति 2 जामेव दिसं पाउन्भूया तामेव दिसं पडिगया 7 // सूत्र 434 // भंतेत्ति भगवं गोयमे समणं भगवं महावीरं वंदइ णमंसइ 2 एवं वयासी-पभू णं भंते ! इसिभद्दपुत्ते समाणोवासए देवाणुप्पियाणं अंतियं मुडे भवित्ता श्रागाराश्रो अणगारियं पव्वइत्तए ?, गोयमा ! णो तिण? सम?; गोयमा ! इसिभद्दपुत्ते समणोवासए बहूहि सीलव्वय-गुणवयवेरमण-पञ्चक्खाण-पोसहोववासेहिं ग्रहापरिग्गहिएहिं तवोकम्मेहि अप्पाणं भावेमाणे बहूई बासाइं समणोवासगपरियागं पाउहिति 2 मासियाए संलेहणाए अंत्ताणं झूसेहिति 2 सढि भत्ताई श्रणसणाई छेदेहिति 2 श्रालोइयपडिक्कते समाहिपत्ते कालमासे कालं किच्चा सोहम्मे कप्पे अरुणामे विमाणे देवत्ताए उववजिहिति, तत्थ णं अत्थेगतियाणं देवाणं चत्तारि पलियोधमाई ठिती पराणत्ता, तत्थ णं इसिभदपुत्तस्सवि देवस्स चत्तारि पलिग्रोवमाई ठिती भविस्सति 1 / से णं भंते ! इसिभद्दपुत्ते देवे तातो देवलोगाश्रो बाउक्खएणं भवक्खएणं ठिक्खएणं जाव कहिं उववजिहिति?, गोयमा ! महाविदेहे वासे सिज्झिहिति जाव अंतं काहेति 2 / सेवं भंते ! सेवं भंते ! ति भगवं गोयमे जाव अप्पाणं भावमाणे विहरइ // सूत्रं 435 // तए णं समणे भगवं महावीरे अन्नया कयावि पालभियायो नगरीयो संखवणायो चेइयायो पडिनिक्खमइ पडिनिक्खमित्ता बहिया जणवयविहारं विहरइ 1 / तेणं कालेणं तेणं समएणं ग्रालंभिया नामं नगरी होत्था वनयो, तत्थ णं संखवणे णामं चेइए होत्था वन्नयो, तस्स ण संखवणस्स अदूरसामंते पोग्गले नाम परिव्वायए परिवसति रिउव्वेदजजुरवेद जाव नएसु सुपरिनिट्टिए छट्टछट्टणं अणिक्खित्तेणं तवोकम्मेगां उड्ड-बाहायो जाव 51
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