Book Title: Agam Sudha Sindhu Part 02
Author(s): Jinendravijay Gani
Publisher: Harshpushpamrut Jain Granthmala

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Page 440
________________ श्रीमद्व्याख्याप्रज्ञप्ति (श्रीमद्भगवती) सूत्र : शतकं 12 : उ०१] [423 केवतिया पोरालियपोग्गलपरियट्टा अतीता ?, नत्थि एकोवि 10 केवतिया पुरेक्खडा ?, नत्थि एकोवि 11 / एगमेगस्स णं भंते ! नेरइयस्स असुरकुमारत्ते केवतिया पोरालियपोग्गलपरियट्टा अतीया ? एवं चेव, एवं जाव थणियकुमारत्ते जहा असुरकुमारत्ते 12 / एगमेगस्स णं भंते ! नेरइयस्स पुढविकाइयत्ते केवतिया पोरालियपोग्गलपरियट्टा अतीता ?, अणंता 13 / केवतिया पुरेक्खडा ?, कस्सइ अस्थि कस्सइ नत्थि जस्सत्थि तस्स जहन्नेणं एको वा दो वा तिन्नि वा उक्कोसेणं संखेजा वा असंखेजा वा घणंता वा एवं जाव मणुस्सत्ते, वाणमंतर-जोइसिय-वेमाणियत्ते जहा असुरकुमारते 14 / एगमेगस्स णं भंते ! असुरकुमारस्स नेरइयत्ते केवतिया अतीया पोरालियपोग्गलपरियट्टा ? एवं जहा नेरइयस्स वत्तव्यया भणिया तहा असुरकुमारस्सवि भाणियव्वा जाव वेमाणियाणं, एवं जाव थणियकुमाररस, एवं पुढविकाइयस्सवि, एवं जाव वेमाणियस्स, सव्वेसि एको गमो 15 / एगमेगस्स णं भंते ! नेरइयस्स नेरइयत्ते केवतिया वेउव्विय-पोग्गलपरियट्टा अतीया ?, अणंता 16 / केवतिया पुरेक्खडा ?, एकोत्तरिया जाव अणंता, . एवं जाव थणियकुमारत्ते 17 / पुढवीकाइयत्ते पुच्छा, नत्थि एकोवि 18 / केवतिया पुरेक्खडा ?, नत्थि एकोवि, एवं जत्थ वेरब्वियसरीरं अस्थि तत्थ एगुत्तरियो जत्थ नत्थि तत्थ जहा पुढविकाइयत्ते तहा भाणियव्वं, जाव वेमाणियस्स वेमाणियत्ते 11 / तेयापोग्गलपरियट्टा कम्मापोग्गलपरियट्टा य सव्वस्थ एकोत्तरिया भाणियव्वा, मणपोग्गलपरियट्टा सव्वेसु पंचिंदिएसु एगोत्तरिया, विगलिंदिएसु नस्थि, वइपोग्गलपरियट्टा एवं चेव, नवरं एगिदिएसु नत्थि भाणियव्वा 20 / प्राणापाणुपोग्गलपरियट्टा सव्वत्थ एकोत्तरिया जाव वेमाणियस्स वेमाणियत्ते 21 / नेरइयाणं भंते ! नेरइयत्ते केवतिया पोरालियपोग्गलपरियट्टा अतीया ?, नत्थि एकोवि 22 / केवइया पुरेक्खडा ?, नत्थि एकोवि, एवं जाव थणियकुमारत्ते 23 /


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