Book Title: Agam Sudha Sindhu Part 01 of 01
Author(s): Jinendravijay Gani
Publisher: Harshpushpamrut Jain Granthmala
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________________ यास क्रियाषट्पमितेविरामो, .. ____भवन्ति सुज्ञैः परिकीर्तिता याः // 24 // आख्यानकी स्याद्विपरीतपूर्वा, ____ यदीन्द्रवज्राचरणः पुरस्तात् / उपेन्द्रवज्राचरणास्त्रयोऽन्ये, मनीषिणोक्ता शुभकार्यकारिन् // 25 // प्रथमलघुकषट्कवर्णकं नवमचरमपूर्वकं तथा।। भवति सुजन ! यत्र भाषिता, ननरलगयुतैव भद्रिका | // 26 // आद्यमक्षरमतस्तृतीयकं सप्तमं च नवमं तथान्तिमम् / दीर्घमब्धिगतिभि-विरामका रानराविह रथोद्धता लगौ // 27 // अक्षरं तु नवमं दशमं चेद्व्यत्ययाद्भवति पूर्वत आर्य / स्वागतेति रनभाद्गुरुयुग्मं चाब्धिवेदसुमितैर्हि विरामः // 28 // प्रथमाक्षरमाद्यतृतीययोद्रुतविलम्बितकस्य न पादयोः।। लगपारसकारगणैस्त्रिभि-नभमरैस्तु गणैर्हरिणीप्लुता // 29 // इस्वो वर्णः स्यात्सप्तमो यत्र योगिन् ! तद्वद्विन्यस्तो वर्ण एकादशायः / बाणैर्विश्रामस्तत्र चेत्स्यात् तुरङ्ग. मौं यो नाम्ना सा भाषिता वैश्वदेवी // 30 // उपेन्द्रवज्राचरणेषु सन्ति चे दुपान्त्यवर्णा लघवः कृता यदि / जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ ___ सनाथ ! निदोपमिदं बुधैस्तदा // 3 // वंशस्थपादा गुरुपूर्ववर्णका यस्यां भवेयुः क्षतिभिर्विवर्जिताः / स्यादिन्द्रवंशा खलु तो जरौ मुने! ___ विश्रामभाग्या शरवाहसंख्यकैः // 32 / सतृतीयकषष्ठमखण्डमते ! नवमं विरतिप्रभवं गुरु चेत् / इह तोटवृत्तमिदं गतिसैः निपुणैः कविभिः कमनीयमते // 33 // यदि तोटकस्य गुरु पश्चमकं, रससंख्यकं गुरु न चेदिहितम् / प्रमिताक्षरा सजससैरुदिता शुभकर्मवीर! निपुणैः कविभिः॥३४॥

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