Book Title: Yashodhar Charitra
Author(s): Manikyasuri, 
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj

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Page 9
________________ चरित्र यशोधर | नमोऽस्तु गुरवे तस्मै । नमो देवाय चाईते ॥ नमोऽस्तु सर्वसिझेन्यो । धर्माय च नमो न- मः॥ ५७ ॥ शरणं ते ममाईतः । सिक्षाश्च शरणं मम ॥ शरणं साधवः सर्वे । धर्मश्च शरणं मम ॥ ५ ॥ नूनं निरपराधाना-ममर्षोद्धर्षणा नवेत् ।। परं सन्यस्तशस्त्राणां । तत्रापि वचनीयता ॥ ५५ ॥ दीप्यतो मम कोपाग्ने-स्तपस्तेजोमयस्य च ॥ जगंति त्रीणि चैतानि । प्रश्रमाप्याहुतिनवेत् ॥ ६० ॥ कः कमेत सुधीस्तर्हि । न्याय्ये कोपस्य कारणे ॥ यदि नैककृतं पापं । कोटिधा परिपच्यते ॥ ६१ ॥ श्चमाश्वास्यमाना सा | बांधवेन तपस्विनी ॥ जगाद ग दं बाला । प्रमृज्य नयनांबुजे ॥ २ ॥ जानामि नवतः शौर्य । जानामि नवतस्तपः ।। करुणा मयि दीनायां । तव बांधव युज्यते ॥ ६३ ॥ नाहं मृत्युनयानात-विलपाम्यतिविह्वला ॥ पशुवचस्त्रघातेन । किं पुनर्मुत्युरावयोः ॥ ६ ॥ इदमेवंविधं कष्ट-मपमानपदं च यत् ॥ अपारलौकिकं वातः । स्त्रीजावाछिलपामि तत् ॥ ६५ ॥ अथवा यादृशं येन । कर्म किंचिउपार्जितं ॥ अनृणीनवतस्तस्य । हर्षः प्रत्युत जायते ॥ ६६ ॥ साहं शोकं करिष्यामि ।। न मनागपि संप्रति ॥ एवंविधापि योगी । बोधिता बांधव त्वया ॥६॥ हा नपालकु. EEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEE EEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEE ॥3॥ Jan Education International For Personat & Private Use Only www.jainelibrary.org

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