Book Title: Yashodhar Charitra
Author(s): Manikyasuri, 
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj

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Page 29
________________ ॥ N I यशोधर || स हतः पिष्टकुर्कुटः ॥ ए३ ॥ सा तं चंमती माता । शेषा नदणैषिणी ॥ सिकर्माख्य-चरित्रं | सूदेन । मांसपाकमपाचयत् ॥ ए४ ॥ोजनावसरे पूर्व । ताम्रचूमस्य जांगलं ॥ देवीप्रसत्तिबुद्ध्या मे । जनन्या परिवेषितं ।। एए॥ दं पिष्टमपि प्रायो। मांसकल्पनया कृतं ॥ न मया स्वीकृत तस्मा-जनन्या चाग्रहः कृतः ॥ १६ ॥ तामूचिवानहं पूज्यां । म मह्यं रोचते पलं ॥ शुक्रशोणितसनूतं । अमेध्यं मांसमुच्यते ॥ ७ ॥ किमहं गृध्रपतीव । मांसास्वादनतत्परः ॥ तदाननस्थमपि मे । वमनायामिषं भवेत् ॥ ए ॥ यम लक्ष्याम्येनं । स वै मां नयिष्यति ॥इत्याभिषस्य ल. झै-मसिनामान्वयः कृतः॥ एए ॥ इत्यादिवादिनमकारणवैरिणी मां । सा पाणिना परि. निगृह्य नृशं हसंती ॥ चिकेप वक्त्रकुहरे ककवाकुमांसं । माता ततो मनसि चंवती मुमोद ॥ १० ॥ मध्य दिनाशनविधेरनुजातपुष्टि-स्तांबूलचंदनविलेपनमाल्ययुक्तः ॥ सौवर्णदंडचखचामरवीज्यमानः । कालं कियंतमपि निर्गमयांबनूव ॥१॥ अवसरमश्र दत्वा सांध्यनादे लवेयमित्यध्याहारः। FEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEE #EEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEE Jan Education International For Personal & Private Use Only

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