Book Title: Yashodhar Charitra
Author(s): Manikyasuri,
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj
View full book text
________________
EEEEEE
यशोधर । षु स्फुटारवं ॥ ५५ ॥ अस्वीकृतपलाशानां । तामनादप्यनागसां ॥स रेमे वर्ममर्मज्ञः । क्री- चरित्र
मां चैत्रपलाशकां ॥ ५५ ॥ व्योम्नि दोलाविलोलांगं । चलत्कुंडलमंडलं ॥ ददृशुस्तं मृगदृशो । वैमानिकमिवामरं ॥ ५६ ॥ श्रांतस्य तस्य दोलान्निः । स्थूलमुक्ताफलोज्ज्वलः ॥ नालस्थसमलंचक्रे । घर्मवारिकणोत्करः ॥ ५७ ॥ नित्वा सुमनसा कोशान् । जमप्रकृतिरात्मना ॥ नपासर्पत तं वाय-मंद मंदं नयादिव ॥ ५॥ सरांसि चलदंन्नांसि । तपारामाश्च पुष्पिता ॥ क्रीडाशैलाः पृथुप्रस्थाः । सहायाश्च लतागृहाः ॥ ५५ ॥ सारंगाश्च मदोन्मत्ताः। कूजंत. श्व पतत्रिणः ॥ आनिन्यिरे परां कोटिं। तस्योत्कंगरसं हृदि ॥ ६ ॥ स्वैरं विहृत्य सर्वत्र । नंदनप्रतिमे वने ॥ अध्याससाद सानंदं । स नंदिङमवेदिकां ॥१॥ नानाविधानि मधुराणि मनोहराणि । सौरच्यवंति सरसानि पचेलिमानि ॥ आनिन्यिरे नरपतेरिद तस्य हेतो-र्वयोज्ज्वलानि विपुलानि फलानि नृत्याः ॥ ६ ॥ विविधतरुन्नवं विचित्रवर्ण । सपरिमलं च ॥७॥ विचित्रनुत्यवर्गः ।। अहमहमिकयानिनाय तस्मै । किसलयसंवलितं प्रसूनन्नारं ॥ ६३ ॥ वलीकंदतदुम्नवरनिनवैस्त्वपत्रपुष्पैः फलैः । पक्वापक्वविन्नक्तियुक्तिरचनासंयोजनाचारुन्निः |
REEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEE
EEEEEEEE
Jain Education International
For Personal & Private Use Only
www.jainelibrary.org

Page Navigation
1 ... 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130