Book Title: Yashodhar Charitra
Author(s): Manikyasuri,
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj
View full book text
________________
यशोधर । करकिसलयबहे कंकणे दर्पणेन ।। ७३ ॥ इत्यापातकपंकशंकुशमने गंगातरंगावली । निःशं- चरित्रं
| कं दुरितानि दंतुरयतो लोकस्य लोहार्गला ॥ मुक्तिधारकपाटसंपुटतटप्रस्फोटने कुंचिका । से॥१७॥ यं सर्वजनैर्यशोधरकथा स्वस्त्रैः समाकर्यतां ॥ ७ ॥ ॥ इति श्रीमाणिक्यमूरिविरचिते श्रीयशोधरचरित्रे हितीयः सर्गः समाप्तः ॥ श्रीरस्तु ॥
॥ अथ तृतीयः सर्गः प्रारभ्यते ॥ मयूरो नकुलो मीनः । सर्पो मेषश्च कुर्कुरः ॥ निहत्य कुर्कुटं पैष्टं । पापाज्ञजा बनूव सः ॥१॥ श्वा सर्पः शिशुमारश्च । अजामहिषकुर्कुटी ॥ निहत्य कुर्कुटं पैष्टं । पापान्माता बनूब सा ॥२॥ नवेष्वेषु परिभ्रांतौ । मातापुत्रौ विधेर्वशात् ॥ प्रहारैरेव सर्वत्र । मृतौ तौ जातु न स्वयं ॥ ३ ॥ अस्त्यतिषु विख्याता । विशालानामतः पुरी ॥ एकं विनूषणं नू मेर्यातामुज्जयिनी विपुः ॥४॥ वापीकूपसरःपूर्णा । धनधान्यसमाकुला ॥ नद्यानवनवि- ॥१७॥
बिन-त्रिकचत्वरशालिनी ॥ ५ ॥ प्राकारपरिखार्ग-प्रतोलीपरिवेष्टिता ।। नत्तुंगतोरणस्तंनहै जिनमंदिरमंडिता ॥ ६ ॥ सर्वसौख्यमयी रम्या । सर्वधर्मसमन्विता ॥ या नित्यं नूतले ना- 1
EEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEE
Jain Education Internatonal
For Personal & Private Use Only
www.jainelibrary.org

Page Navigation
1 ... 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130