Book Title: Yashodhar Charitra
Author(s): Manikyasuri,
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj
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यशोधर।
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संध्यादिवारात्रिघटीसमेतं । जनायुरंतःपरिशोषणाय ॥ आदित्यचं वृषनौ बलिष्टौ । 'चरित्रं
कालारघट्ट परिवर्तयेते ॥ ३६ ॥ बालस्य मातुः स्तनपानकृत्यं । यूनो वधूसंगम एव तत्वं ॥ ॥१॥ वृक्षस्य चिंता चलचित्तवृत्ने-रहो न धर्मः कण एव पुंसः ॥ ३७॥ यौवनं जलतरंगचंचलं ।
जीवितं जलदजालसन्निनं ॥ संगमाः कपटनाटकोपमा । हंत दुस्तरतरो नवोदधिः ॥ ३० ॥ निगृह्य केशेषु निपात्य दंतान् । बाधिर्यमाधाय विधाय चांध्यं ॥ कामान् बलादेव जरा हिनस्ति । स्वेनैव नो मुंचति पूर्वमेव ॥ ३५ ॥ अचिंतिता स्यात्परलोकयात्रा । पूर्व हि पायमतो विधेयं ॥ प्रदीप्यमाने नवने न शक्यं । कूपं समुत्पादयितुं तदैव ॥ ४० ॥ ततः परित्यज्य जवेन राज्यं । तपोवने यामि विनीतवेषः॥ अभुक्तनोगैर्जगृहे व्रतं य-त्रः पूर्वजैर्मे पलितं तु दृष्टं ॥१॥ पट्टानिषेकं तनयस्य कृत्वा । दिनत्रयानंतरमेव नूनं ॥ निकाचरः कानननूमिशायी । व्रतं चरिष्यामि विमुक्तसंगः ॥४२॥ ___समाधिलीनः समशत्रुमित्रो । निरंजनो निर्विषयो निरीहः ॥ तपस्विनां मार्गमौलमिBष्टं । मोरं महानंदमवाप्तुकामः ॥ ३ ॥ एवं मयि महाराज । तदा दीकोन्मुखे सति ।। सा ||
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