Book Title: Yashodhar Charitra
Author(s): Manikyasuri,
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj
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यशोधर: ब्रह्मचारी तपस्यति ॥ ७ ॥ क एष वृषनस्कंधो । विशालाक्षो महाभुजः ॥ पिदधातीव चरित्र
नः सर्वा-नर्यमेव प्रनानरैः ॥ ॥ कुवलयदलनीलः पीवरस्कंधबंधो । नगरपरिघबाहुः पर्वतप्रस्थवदाः ।। प्रगुणगुणपयोधिः कोऽप्ययं स्वप्रनावा-दनुनयमिव कर्तुं सोत्सुकानः करोति ॥ ए ॥ महति तपसि तिष्टनेष कुर्वारवीर्यो । यदि कथमपि कोपं शौर्यनावेन कुर्यात् ॥ तदयमदयकौलो योगिनोचक्रचारु-चनपशुवधमेध्याविड्वरः स्यान्महो नः ॥ १० ॥
इयमपि कनकांगी केतकीपत्रनेत्रा । शशधरवदना नः साध्वसं संदधाति ॥ अनवनतनितंबस्तंबसंववाह-दुमतलदलवस्त्रा दृश्यमानाखिलोरुः ॥११॥ स्तनकलशविशाला कंबुकंठी कृशांगी। किसलयसदृशोष्ठी दाडिमीबीजदंता ॥ श्यमनुपमकांतिः शांतिनावं दधाना। विरचयति चिरं नश्चतसां शोकशंकू ॥१२॥ न हि नवति नवानी मन्यते नापि लक्ष्मीन च नवति शचीयं रोहिणी वा रतिर्वा ॥ शमदमरमणीयं नावमाविष्किरती । मदमदन-॥१०॥ विहीना केयमन्यातिधन्या ॥ १३ ॥ अथासौ विस्मयाविष्टो । जगाद जगतीपतिः ॥ आश्वासनामिवातन्व-त्रन्निरामविलोकितैः ॥ १४॥ हा युवको मिथः स्निग्धौ । वपुषा वयसा स
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