Book Title: Yashodhar Charitra
Author(s): Manikyasuri, 
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj

View full book text
Previous | Next

Page 10
________________ चरित्र यशोधरालोस । दाऽवंतीश्वरनंदन ॥ हा कुमार तपोराशे । परिपाकः क एष ते ॥ ६ ॥ अपि ते हि परित्यक्ताः । शोकमोहादयो विषः ॥ पुनः श्लिष्यंत्यनाथां मां । हा कुमार करोमि किं ॥६५॥ एवं तयोः सुमनसोः । पुरुषैह्यमाणयोः॥ चराचरैः शुश्रविरे । गन्नीरकरुणा गिरः ॥ ७० ॥ चकंपे सहसा नूमिः । पिदधे रेणुनिनन्नः ॥ संभ्रांत श्व संजझे । ननस्वानपि निश्चलः ॥ १ ॥ माडमंगलं रेजे। राहुग्रस्तमिवाकुलं ॥ नन्नतानां गिरीशणां । शिरोनतिरिवान्नवत् ॥ ७२ ॥ अचेतना अपि प्राय-स्तिमिताः साध्वसादिव ॥ अविशनंगमंगेन । लतानिः सह शाखिनः ॥ ३ ॥ हाहारवपरैः पौरैः । पिहिताधोमुखस्थितैः ॥ शिलायात इ. व व्यगृ-रनुनूतः प्रघट्टकः ॥ ४ ॥ श्राः पाप निष्करुण नास्तिकलोकनक्त । किं मारिदत्त न हि यासि रसातलं त्वं ॥ स्त्रीबालवृक्षपशुघातकपातकैर्न-स्त्वं नूपतिः स्फुटमन्नूरिह हा हताशः ॥ ५ ॥ कष्टं हि नो किमपि कष्टमन्नूतपूर्व । हा कर्म दारुणमहो बत वज्रपातः ॥ नो नो जनाः प्रविशत ज्वलिते चिताग्नौ । नायं हि वः समयजीवितुमस्ति कालः॥ ६ ॥ १ समयमात्रमपि जीवितुमित्यर्थः ॥ EEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEE EEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEEE ॥ ॥ Jain Education Internatonal For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org

Loading...

Page Navigation
1 ... 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 ... 130