Book Title: Prakrit Vidya 2003 01
Author(s): Rajaram Jain, Sudip Jain
Publisher: Kundkund Bharti Trust

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Page 60
________________ प्राचार्यश्री ने कुण्डपुर (वैशाली) को भगवान् महावीर की जन्मस्थली मान लेने पर ' के पुराण-विषयक विसंगतियाँ उत्पन्न होने का संकेत दिया। उनका इशारा 'उत्तरपुराण' पर्व 75 के श्लोक तीन में वर्णित राजा चेटक की राजधानी की ओर है जिसमें 'सिन्ध्वाढ्य-विषये भूभृद्वैशाली नगरेऽभवत्' के अनुसार सिंधु- प्रदेश के वैशाली का राजा बताया है। विदेह देश के बाहर वैशाली को खोजने के पहले हमें पर्व 75 के श्लोक 20-31 के घटनाक्रम के मध्यम संगति बैठाना होगी, जिसके अनुसार राजा चेटक सेना के साथ राजगृह जाते हैं और श्रेणिक ज्येष्ठा और चेलना से विवाह का प्रस्ताव करता है। चेटक की अस्वीकृति के बाद राजकुमार अभय षडयंत्रपूर्वक सुरंग मार्ग से चेलना को वैशाली से राजगृह लाकर उसकी शादी श्रेणिक से करवाता है। इस घटना की पुष्टि 'पुण्यास्रव-कथाकोषकार' श्री रामचन्द्र मुमुक्षु ( 12वी - 13वी शताब्दी) ने की है और लिखा है कि सुरंग मार्ग से कुछ ही दिनों में वैशाली से राजगृह चेलना को ले आया । 'दिनान्तरे राजगृहं समाययौं' – ( पृष्ठ 41 ) । इससे यह तो निर्विवादरूप से स्पष्ट है कि वैशाली से राजगृह की दूरी इतनी रही होगी, जिसे सुरंग मार्ग से कुछ दिनों में तय की जा सके। विद्यमान बसाड़ (वैशाली) से यह सम्भव है, किन्तु पाकिस्तान - पंजाब स्थित सिंध देश से यह कदापि सम्भव नहीं है? इसे अस्वीकारने पर हम अपने ही आगम-कथन को संदिग्ध - अप्रामाणिक सिद्ध कर देंगे । यहाँ 'सिन्ध्यवाढ्यविषये' का अर्थ नदीप्रधान 'विदेह' नामक प्रदेश में स्थित वैशाली नगर से है, जिसमें चेटक निवास करते थे - (वर्धमान जीवन कोश, पृष्ठ 86 ) । सिन्धु का एक अर्थ नदी होता है। - (आदिपुराण, भाग 2, पृष्ठ 548) सिन्धु देश का आशय है— नदी के तीर पर स्थित प्रदेश - तीर प्रदेश-तीर भुक्ति । पश्चिम के सिन्धु सौवीर से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है। यह उल्लेखनीय है कि आचार्य जिनसेन ने भरत की पश्चिम दिग्विजय यात्रा में मद्र, कच्छ, कश्मीर आदि के साथ सिन्धु नामक किसी देश का उल्लेख नहीं किया – ( आदिपुराण, भाग 2, पर्व 29, श्लोक 39-42 एवं 47-48 ) । नदियों के नामों में सिन्धु नदी का नाम आया है – (वही, श्लोक 61-66 ) । तथा पर्व 35, श्लोक 27 में 'सिन्धुश्च' शब्द का अर्थ नदी माना है – (वही, पृष्ठ 174 एवं 548 ) । इस संदर्भ में 'सिन्ध्वाढ्य' का भाव देश न होकर जल / नदी मानने से आगम के उक्त कथनों की संगति एवं सम्भाव्यता सिद्ध होती है । यथार्थ को अस्वीकार करने हेतु निकटवर्ती सहज स्थिति या अर्थ की उपेक्षा . करने पर हम निराधार हो जायेंगे । समग्रता में वैशाली का विदेह में स्थित होने की पुष्टि होती है। दिगम्बरेतर-साहित्य भी इसकी पुष्टि करता है । प्राचार्य श्री से साग्रह अनुरोध है कि वे खुले मन से दिगम्बर - आगम के कथनों के संदर्भ में निर्णय करें और काल्पनिक-विसंगतियों के बोझ से मुक्त हों - 1 प्राचार्यश्री का यह आरोप भी आधारहीन एवं दुर्भावनापूर्ण है कि केन्द्र सरकार से ☐☐ 58 प्राकृतविद्या जनवरी-जून 2003 (संयुक्तांक )

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