Book Title: Prachin Tibbat
Author(s): Ramkrushna Sinha
Publisher: Indian Press Ltd

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Page 163
________________ १६३ उपसंहार देखने लगता है कि कब जल्दी से जल्दी उस पहला भाग्यवान् व्यक्ति, जिसे इस जादू के देश में रहन-टिकने का जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त है, मिले और वह अपनी इस अनधिकार चेष्टा के लिए उससे क्षमायाचना करके अपराध का बामा सिर से उतार फेंके। तो क्या यह कहें कि तिब्बत को प्रसिद्धि जिन कारणों से दूर. दूर के देशों तक पहुँची है, वह केवल मिथ्या भ्रम है ? उनमें काई तत्त्व नहीं है ? नहीं। तब ? तब सबसे सहल उपाय यह है कि तिब्बतियों की इन अलोकिक घटनाओं के विषय में अपनी जो निजी धारणाएं हैं उन्हीं का सहारा लें, यद्यपि वे भी विचित्रता से खाली नहीं हैं। तिब्बत भर में यह तो कोई नहीं कहता कि ऐसी घटनाएँ असम्भव हैं, लेकिन उनमें अलौकिकता का अंश मानने के लिए कोई तैयार नहीं होगा। ___ अलौकिक तत्त्व-वाद किस चिड़िया का नाम है-यह यहाँ काई व्यक्ति नहीं जानता। तिब्बतवालों का कहना है कि इन अलौकिक घटनाओं के पीछे काई असाधारण बात नहीं रहती। जिस तरह प्रतिदिन और सब चीज़ हमारी आँखों के सामने होती नजर आती है, उसी तरह ये भी हैं। प्राकृतिक नियमों की थोड़ी सी जानकारी और कुछ सावधानी की आवश्यकता होनी चाहिए और फिर जो जब चाहे तब, जैसे चाहे वैसे, करतब कर सकता है। दूसरे मुल्कों में जिन घटनाओं के होने में एक ऊपरी दुनिया को जीव-शक्तियों का हाथ होना स्वीकार किया जाता है वे, तिब्बती लामाओं के कहने के अनुसार, मानसिक प्रवृत्तियों से प्रभावित होनेवाली साधारण घटनाएँ हैं । इन घटनाओं का तिब्बती दो हिस्सों में बाँटते हैं (१) वे घटनाएं, जो अनजान में एक या कई व्यक्तियों के मनोभावों से प्रभावित होकर घटती है। इस दशा में कत्ता को Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, kurnatumaragyanbhandar.com

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